उपराष्ट्रपति ने आईसीएसआई के 58वें स्थापना दिवस पर कंपनी सचिवों को सुशासन का संरक्षक बताया
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में आईसीएसआई के 58वें स्थापना दिवस को संबोधित किया। उन्होंने कंपनी सचिवों को कॉर्पोरेट जगत में विश्वास और सुशासन का मुख्य आधार बताते हुए उन्हें 'गवर्नेंस के संरक्षक' की संज्ञा दी। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण में पेशेवर संस्थानों की भूमिका पर जोर दिया और एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027 का अनावरण किया।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) के 58वें स्थापना दिवस समारोह में भाग लिया। उन्होंने संस्थान की छह दशक लंबी यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि पारदर्शी और नैतिक कॉर्पोरेट प्रशासन को मजबूत करने में आईसीएसआई का योगदान सराहनीय है। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि सुशासन एक अदृश्य बुनियादी ढांचा है, जो निवेशकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
उन्होंने कंपनी सचिवों को 'गवर्नेंस के संरक्षक' के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि वे भारतीय उद्योग जगत की नैतिक और रणनीतिक नींव के केंद्र में हैं। बदलते दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक निर्णय लेने में सहायक हो सकती है, लेकिन ईमानदारी और जवाबदेही का दायित्व हमेशा मानव के पास ही रहेगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भौतिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ मजबूत संस्थानों की भी उतनी ही आवश्यकता है। उन्होंने आईसीएसआई, आईसीएआई और आईसीएमएआई को देश के आर्थिक इको-सिस्टम के प्रमुख स्तंभ बताया। उन्होंने युवाओं को इस पेशे से जोड़ने के लिए आईसीएसआई की शुल्क-माफी पहल की प्रशंसा की और छात्रों तक पहुंच बढ़ाने का आग्रह किया।
समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति ने एमएसएमई अनुपालन कैलेंडर 2027 का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टार्ट-अप और एमएसएमई क्षेत्र के लिए संस्थान द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'शहीद की बेटी' पहल के तहत रक्षा कोष में आईसीएसआई के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि नेक इरादे से किए गए कार्य हमेशा सफल होते हैं।
अपने संबोधन के अंत में, उन्होंने आईसीएसआई बिरादरी से देश के प्रति अपने विश्वास को बनाए रखने और एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखना चाहिए ताकि देश अपनी शर्तों पर आगे बढ़ सके। इस अवसर पर आईसीएसआई के अध्यक्ष पवन चांडक, पूर्व सांसद डॉ. सोनल मानसिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
