ताज़ा अपडेटउपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में महापर्व क्षमापना समारोह को संबोधित किया, अहिंसा का महत्व समझाया
Vimarsh Naarad TV logoस्वतंत्र डिजिटल न्यूज़Vimarsh–Naarad TVखबर • विमर्श • जनता की आवाज़
डिजिटल संस्करणYouTube
समाचार श्रेणियां

उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में महापर्व क्षमापना समारोह को संबोधित किया, अहिंसा का महत्व समझाया

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में आयोजित महापर्व क्षमापना समारोह में क्षमा, अहिंसा और करुणा के मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षमा का अर्थ बदले की जगह सुधार और घृणा के स्थान पर संवाद चुनना है। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण के लिए नागरिकों में विश्वास और समाज में करुणा की आवश्यकता पर बल दिया।

आधिकारिक स्रोत की पोस्ट: X

उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित महापर्व क्षमापना समारोह-2026 को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन भगवान महावीर स्मारक समिति और जैन महासभा दिल्ली द्वारा किया गया था। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को क्षमा, मित्रता और आंतरिक शुद्धि के मूल्यों का उत्सव बताया।

अपने संबोधन में, उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षमा का अर्थ अन्याय को स्वीकार करना नहीं है, बल्कि यह बदले की भावना को त्यागकर सुधार और सुलह का मार्ग चुनने का नाम है। उन्होंने अहिंसा को केवल शारीरिक हिंसा से मुक्ति नहीं, बल्कि विचार, वचन और कर्म से हिंसा का अभाव बताया।

उपराष्ट्रपति ने जैन धर्म के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जैन परंपरा ने क्षमा को एक आध्यात्मिक अनुशासन के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने तमिल साहित्य और संस्कृति में जैन विद्वानों के योगदान को याद करते हुए कहा कि यह भारत की साझा विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने 'वसुधैव कुटुम्बकम' के भारतीय लोकाचार का उल्लेख करते हुए कहा कि जैन दर्शन की शिक्षाएं आज की संघर्षपूर्ण दुनिया में शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने लोगों से क्रोध और असहिष्णुता पर विजय पाने का आह्वान किया।

विकसित भारत @ 2047 के दृष्टिकोण पर चर्चा करते हुए, श्री राधाकृष्णन ने कहा कि केवल आर्थिक समृद्धि ही काफी नहीं है। एक विकसित राष्ट्र के लिए नागरिकों के बीच आपसी विश्वास, परिवारों में नैतिक मूल्य और समाज में करुणा का होना अनिवार्य है।

उन्होंने 'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र को दोहराते हुए युवाओं से चरित्र निर्माण और जिम्मेदारी के मूल्यों को अपनाने का आग्रह किया। इस अवसर पर उन्होंने श्री के. सी. जैन को 'जैन समाज रत्न पुरस्कार' से सम्मानित किया।

कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया सहित कई गणमान्य व्यक्ति और जैन धर्म के संत उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति ने सभी से समाज में एकता और सेवा की भावना को बढ़ावा देने की अपील की।

स्रोत

मूल संदर्भ

01Press Information Bureauमूल रिपोर्ट देखें ↗