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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 21 सितंबर को तमिलनाडु का दौरा करेंगे, शताब्दी सम्मेलन में होंगे शामिल

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन 21 सितंबर 2026 को तमिलनाडु के दौरे पर रहेंगे। इस यात्रा के दौरान वे नीलगिरी के कुन्नूर में आयोजित यूपीएएसआई टी रिसर्च फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेंगे। यह संस्थान दक्षिण भारत के चाय उद्योग के लिए एक प्रमुख वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र है, जिसकी स्थापना 1926 में हुई थी।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन 21 सितंबर को तमिलनाडु का दौरा करेंगे, शताब्दी सम्मेलन में होंगे शामिल
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: Government of India Press Information Bureau · CC BY 4.0 · Openverse

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन आगामी 21 सितंबर, 2026 को तमिलनाडु की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस दौरे का मुख्य उद्देश्य नीलगिरी जिले के कुन्नूर में आयोजित होने वाले एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेना है।

उपराष्ट्रपति कुन्नूर में यूपीएएसआई (यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ साउदन इंडिया) टी रिसर्च फाउंडेशन के शताब्दी सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। यह सम्मेलन संस्थान की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को चिह्नित करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।

यूपीएएसआई टी रिसर्च फाउंडेशन दक्षिण भारत के चाय उद्योग के लिए एक अग्रणी वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान के रूप में जाना जाता है। इस संस्थान का इतिहास काफी पुराना है और यह चाय की खेती और उत्पादन से जुड़ी तकनीकों में सुधार के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

संस्थान की स्थापना अक्टूबर 1926 में गुडालूर में एक चाय प्रायोगिक केंद्र के रूप में की गई थी। पिछले एक सदी में, इस केंद्र ने चाय उद्योग के विकास और वैज्ञानिक अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उपराष्ट्रपति की इस यात्रा को चाय उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। शताब्दी समारोह के माध्यम से संस्थान अपने पिछले 100 वर्षों के योगदान को प्रदर्शित करेगा और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करेगा।

इस कार्यक्रम में उद्योग जगत के विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और चाय बागान मालिकों के शामिल होने की उम्मीद है। उपराष्ट्रपति का संबोधन इस क्षेत्र के विकास के लिए नई दिशा प्रदान कर सकता है।

पीआईबी के अनुसार, उपराष्ट्रपति सचिवालय ने इस दौरे की पुष्टि की है। यह यात्रा न केवल संस्थान के लिए बल्कि पूरे दक्षिण भारतीय चाय उद्योग के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

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