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ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत को वैश्विक समूहों की आवश्यकता, ब्रिक्स की भूमिका पर विशेषज्ञों का मत

एनडीटीवी इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए अपनी वैश्विक स्थिति मजबूत करने में ऊर्जा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण कारक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत को ब्रिक्स, क्वाड और जी20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना होगा। यह सहयोग देश की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए अनिवार्य है।

दुनिया के बदलते परिदृश्य में भारत अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एनडीटीवी इंडिया के एक विश्लेषण के अनुसार, इस प्रक्रिया में ऊर्जा सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में उभर कर सामने आई है। देश की आर्थिक प्रगति और वैश्विक प्रभाव सीधे तौर पर ऊर्जा की उपलब्धता से जुड़े हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल घरेलू संसाधनों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय समूहों के साथ तालमेल बिठाना होगा।

ब्रिक्स (BRICS) जैसे समूह इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिक्स के पास दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत फॉर्मूला मौजूद है। हालांकि, इस दिशा में अभी भी कुछ कमियां हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।

ब्रिक्स के अलावा, क्वाड (QUAD) और जी20 (G20) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच भी भारत के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। इन समूहों के माध्यम से भारत न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, बल्कि वैश्विक नीतियों को प्रभावित करने की क्षमता भी हासिल कर सकता है।

भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए निरंतर ऊर्जा आपूर्ति एक बड़ी चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना इस चुनौती से निपटना कठिन हो सकता है। इसलिए, इन समूहों के साथ रणनीतिक साझेदारी भारत की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा बन गई है।

रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए खुद ही पहल करनी होगी। अंतरराष्ट्रीय समूहों का उपयोग एक माध्यम के रूप में करना होगा ताकि देश के हितों को सुरक्षित रखा जा सके।

अंत में, यह स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति का भी एक हिस्सा है। भारत के लिए इन अंतरराष्ट्रीय मंचों का सही उपयोग करना भविष्य की राह तय करेगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01NDTV Indiaमूल रिपोर्ट देखें ↗