ताज़ा अपडेटऋषिकेश मुखर्जी की 104वीं जयंती: 'आनंद' और 'अभिमान' जैसी फिल्मों से सिनेमा को दी नई पहचान
Vimarsh Naarad TV logoस्वतंत्र डिजिटल न्यूज़Vimarsh–Naarad TVखबर • विमर्श • जनता की आवाज़
डिजिटल संस्करणYouTube
समाचार श्रेणियां

ऋषिकेश मुखर्जी की 104वीं जयंती: 'आनंद' और 'अभिमान' जैसी फिल्मों से सिनेमा को दी नई पहचान

हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार ऋषिकेश मुखर्जी की आज 104वीं जयंती है। चार दशकों के अपने शानदार करियर में उन्होंने कई ऐसी फिल्में दीं, जिन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, 'अभिमान' ने रिश्तों की जटिलताओं को बखूबी दर्शाया, तो 'आनंद' ने जीवन के दर्शन पर गहरे सवाल खड़े किए। उनकी ऐसी दस बेहतरीन फिल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर बना दिया है।

ऋषिकेश मुखर्जी की 104वीं जयंती: 'आनंद' और 'अभिमान' जैसी फिल्मों से सिनेमा को दी नई पहचान
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: India Post, Government of India · GODL-India · Wikimedia Commons

आज हिंदी सिनेमा के महान निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की 104वीं जयंती मनाई जा रही है। अपने चार दशक लंबे करियर में उन्होंने दर्शकों को ऐसी फिल्में दीं, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली लगती हैं। ऋषि दा के नाम से मशहूर इस फिल्मकार ने अपनी अनूठी शैली से भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों की सबसे बड़ी खासियत उनका मानवीय दृष्टिकोण था। उनकी फिल्म 'अभिमान' ने पति-पत्नी के रिश्तों में आने वाले उतार-चढ़ाव और अहम की लड़ाई को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा था।

वहीं, उनकी कालजयी फिल्म 'आनंद' ने दर्शकों को जिंदगी के प्रति एक नया नजरिया दिया। फिल्म में जीवन और मृत्यु के दर्शन को जिस तरह से पेश किया गया, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। यह फिल्म आज भी सिनेमा प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय है।

ऋषि दा ने अपने करियर में दस से अधिक ऐसी फिल्में बनाईं, जिन्होंने उन्हें एक महान निर्देशक के रूप में स्थापित किया। उनकी फिल्मों में सादगी और गहराई का अद्भुत संगम देखने को मिलता था, जो दर्शकों को सीधे प्रभावित करता था।

अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के साथ उनकी जुगलबंदी ने कई यादगार फिल्में दीं। उन्होंने धर्मेंद्र जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया और उनके अभिनय के अलग पहलुओं को दुनिया के सामने रखा।

उनकी फिल्मों की कहानियां अक्सर मध्यमवर्गीय परिवारों के इर्द-गिर्द घूमती थीं, जिससे आम दर्शक खुद को आसानी से जोड़ पाते थे। यही कारण है कि उनकी फिल्में आज भी उतनी ही पसंद की जाती हैं जितनी उनके रिलीज के समय की जाती थीं।

ऋषिकेश मुखर्जी का योगदान केवल निर्देशन तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने सिनेमा के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को भी बखूबी निभाया। उनकी जयंती पर आज पूरा फिल्म जगत उन्हें याद कर रहा है और उनके द्वारा छोड़ी गई विरासत का सम्मान कर रहा है।

उनकी फिल्में आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। ऋषि दा का सिनेमाई सफर भारतीय फिल्म इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

स्रोत

मूल संदर्भ

01एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजालामूल रिपोर्ट देखें ↗