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एनसीपीसीआर ने मेटा इंडिया को फिर भेजा समन, एमडी और हेड को तलब किया

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मेटा इंडिया को एक बार फिर समन जारी किया है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई बच्चों से संबंधित यौन शोषण सामग्री (CSEAM) के विज्ञापनों के आरोपों की जांच के सिलसिले में की गई है। आयोग ने मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड को 16 सितंबर को पेश होने के लिए तलब किया है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मेटा इंडिया के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग ने मेटा से जुड़े बच्चों के यौन शोषण सामग्री (CSEAM) विज्ञापनों के आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह कदम उठाया है। इस मामले में आयोग ने मेटा इंडिया के शीर्ष अधिकारियों को फिर से तलब किया है।

आयोग ने 16 सितंबर को मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और हेड को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह समन उस जांच का हिस्सा है जो आयोग द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।

एनसीपीसीआर का कहना है कि मेटा के प्लेटफॉर्म पर इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री के विज्ञापन मिलने के मामले में आयोग ने पहले भी सवाल उठाए थे। आयोग का मानना है कि इस मामले में मेटा की ओर से दी गई जानकारी पर्याप्त नहीं थी, जिसके कारण उन्हें फिर से तलब करना पड़ा है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मेटा इंडिया को इन आरोपों का जवाब देने और जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।

यह मामला सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा और डेटा गोपनीयता के व्यापक विमर्श से भी जुड़ा है। एनसीपीसीआर लगातार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

मेटा इंडिया की ओर से इस समन पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, आयोग की ओर से जारी नोटिस के बाद कंपनी पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है।

आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और मेटा के अधिकारियों द्वारा दी जाने वाली सफाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

यह घटनाक्रम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, ताकि वे बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लें और सुरक्षा मानकों का पालन करें।

स्रोत

मूल संदर्भ

01NDTV Indiaमूल रिपोर्ट देखें ↗