सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी: देश में हाथ से मैला ढोने वाला कोई व्यक्ति नहीं मिला
केंद्र सरकार ने राज्यसभा को सूचित किया कि एमएस अधिनियम, 2013 के तहत किए गए नवीनतम सर्वेक्षण में देश में कोई भी व्यक्ति हाथ से मैला ढोने की प्रथा में लिप्त नहीं पाया गया है। सरकार ने नमस्ते योजना के माध्यम से सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मियों की सुरक्षा और कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने राज्यसभा में स्पष्ट किया है कि देश में हाथ से मैला ढोने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है। एक लिखित उत्तर में, राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने बताया कि एमएस अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत देश के सभी जिलों में किए गए हालिया सर्वेक्षण में कोई भी मैनुअल स्कैवेंजर नहीं पाया गया है।
सरकार ने सीवर और सेप्टिक टैंक में काम करने वाले कर्मचारियों (एलएसडब्ल्यू) की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए 'नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम' (नमस्ते) योजना शुरू की है। इस योजना के तहत अब तक पूरे देश में 89,915 सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कर्मियों की पहचान की गई है।
नमस्ते योजना का मुख्य उद्देश्य सफाई कार्यों का मशीनीकरण करना है। इसके तहत कर्मचारियों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट प्रदान करना, सुरक्षा प्रशिक्षण देना और आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ईआरएसयू) को आधुनिक उपकरणों से लैस करना शामिल है। साथ ही, सफाई मशीनों के लिए पूंजीगत सब्सिडी और स्वास्थ्य बीमा कवर भी प्रदान किया जा रहा है।
सदन को यह भी अवगत कराया गया कि स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत 'यूज्ड वॉटर मैनेजमेंट' पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में इंसानों के उतरने की खतरनाक प्रथा को पूरी तरह खत्म करना है।
सरकार ने दोहराया कि एमएस अधिनियम, 2013 के तहत अस्वच्छ शौचालयों के निर्माण और रखरखाव पर कानूनी रोक है। साथ ही, किसी भी व्यक्ति को सीवर या सेप्टिक टैंक की खतरनाक मैन्युअल सफाई के लिए काम पर रखना कानूनन अपराध है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन प्रावधानों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
