एशियन गेम्स टीम से बाहर होने पर वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी ने लगाए भेदभाव के गंभीर आरोप
वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी को एशियन गेम्स की टीम से हटाए जाने के बाद उन्होंने फेडरेशन पर उत्पीड़न और भेदभाव के आरोप लगाए हैं। दिव्यांशी ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा कर अपनी नाराजगी जाहिर की है। वहीं, वुशु एसोसिएशन ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए जवाब दिया है। खिलाड़ी का दावा है कि उनके साथ न्याय नहीं हुआ है, जबकि फेडरेशन ने चयन प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रखी है।
VIMARSHNAARAD TVवुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी ने एशियन गेम्स की भारतीय टीम से हटाए जाने के बाद फेडरेशन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दिव्यांशी को पहले टीम में शामिल किया गया था, लेकिन शुक्रवार को उन्हें अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस फैसले से आहत खिलाड़ी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।
वीडियो में दिव्यांशी काफी भावुक नजर आईं और उन्होंने इसे अपना आखिरी वीडियो बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें टीम से बाहर करने के पीछे भेदभाव और उत्पीड़न की भावना काम कर रही है। खिलाड़ी का कहना है कि उनके साथ जो हुआ वह पूरी तरह से अनुचित है और उन्हें खेल के प्रति अपने समर्पण का यह इनाम मिला है।
दिव्यांशी के इन गंभीर आरोपों के बाद वुशु एसोसिएशन ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। फेडरेशन ने खिलाड़ी द्वारा लगाए गए भेदभाव के दावों पर अपना जवाब दिया है। हालांकि, एसोसिएशन ने चयन प्रक्रिया और खिलाड़ी को ड्रॉप करने के कारणों पर विस्तार से अपनी बात रखी है।
खेल जगत में इस तरह के विवाद अक्सर खिलाड़ियों और प्रबंधन के बीच तनाव पैदा करते हैं। दिव्यांशी का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है, जहां एक तरफ खिलाड़ी अपनी मेहनत और चयन पर सवाल उठा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ फेडरेशन अपने प्रशासनिक निर्णयों का बचाव कर रहा है।
एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच से बाहर होना किसी भी खिलाड़ी के लिए एक बड़ा झटका होता है। दिव्यांशी के इस वीडियो के बाद खेल प्रेमियों के बीच भी बहस छिड़ गई है। फिलहाल, इस मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं और स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।
यह घटना खेल संघों में पारदर्शिता और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती है। खिलाड़ी का आरोप है कि उन्हें बिना किसी ठोस कारण के बाहर किया गया, जबकि फेडरेशन के अनुसार यह एक प्रक्रियात्मक निर्णय था।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होती है या यह विवाद केवल बयानों तक ही सीमित रहता है। फिलहाल, दिव्यांशी के समर्थकों ने उनके समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी है।