एशियन गेम्स स्वर्ण पदक विजेता हॉकी खिलाड़ी इशिका चौधरी ने साझा किया अपने कठिन सफर का अनुभव
भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य इशिका चौधरी का ग्वालियर स्थित उनके आवास पर भव्य स्वागत किया गया। एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली इशिका ने अपने खेल करियर के दौरान झेली गई शारीरिक चोटों और संघर्षों के बारे में खुलकर बात की। अब उनका पूरा ध्यान आगामी लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक खेलों में देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने पर केंद्रित है।

एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की स्टार खिलाड़ी इशिका चौधरी का ग्वालियर में उनके घर पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत हुआ। स्थानीय लोगों और प्रशंसकों ने अपनी लाडली खिलाड़ी का उत्साह के साथ अभिनंदन किया। इस दौरान इशिका ने अपने अब तक के खेल सफर की चुनौतियों को याद किया।
इशिका ने बताया कि उनका खेल करियर आसान नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्हें कई बार गंभीर चोटों का सामना करना पड़ा। उन्होंने खुलासा किया कि खेल के दौरान कभी उनके दांत टूटे तो कभी हाथ में चोट लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर डटी रहीं।
हॉकी के मैदान पर अपनी मेहनत और जज्बे के दम पर पहचान बनाने वाली इशिका ने इन शारीरिक कष्टों को अपने खेल में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने बताया कि चोटों के बावजूद उनका ध्यान हमेशा अपनी टीम के लिए अच्छा प्रदर्शन करने पर रहा। उनके परिवार और समर्थकों ने उनकी इस दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना की है।
ग्वालियर में मिले इस सम्मान से अभिभूत इशिका ने कहा कि यह प्यार और समर्थन उन्हें भविष्य के लिए और अधिक प्रेरित करता है। उन्होंने अपने खेल के प्रति समर्पण को ही अपनी सफलता का मुख्य आधार बताया।
अब इशिका की नजरें भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका अगला बड़ा लक्ष्य लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक है। वह इस वैश्विक मंच पर भारतीय टीम के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीतने की दिशा में काम करना चाहती हैं।
इशिका का मानना है कि निरंतर अभ्यास और अनुशासन ही उन्हें ओलंपिक में सफलता दिला सकता है। वह अपनी फिटनेस और खेल कौशल को और बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
उनके घर पर हुए इस स्वागत समारोह में उनके कोच, परिवार के सदस्य और स्थानीय खेल प्रेमी मौजूद थे। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और ओलंपिक में सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
