एशियन गेम्स 2026: मीराबाई चानू ने बताया सिल्वर मेडल जीतने का सीक्रेट, कोच विजय शर्मा का जताया आभार
एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतने वाली मीराबाई चानू ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच विजय शर्मा के भरोसे को दिया है। एनडीटीवी के साथ एक विशेष बातचीत में मीराबाई ने इसे अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया। वहीं, कोच विजय शर्मा ने इस पदक को ओलंपिक मेडल के समान महत्वपूर्ण करार देते हुए मीराबाई की मेहनत की सराहना की है।
एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली मीराबाई चानू ने अपनी जीत का राज साझा किया है। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि यह पदक उनके लिए केवल एक जीत नहीं, बल्कि वर्षों के कठिन परिश्रम और अटूट विश्वास का परिणाम है। मीराबाई ने कहा कि यह उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है।
अपनी सफलता के पीछे के मुख्य कारण पर बात करते हुए मीराबाई ने अपने कोच विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कोच का उन पर भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है। कठिन समय में जब भी उन्हें संदेह हुआ, कोच के मार्गदर्शन और विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कोच विजय शर्मा ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की। उन्होंने इस सिल्वर मेडल की तुलना ओलंपिक पदक से करते हुए इसे दोनों के लिए बेहद खास बताया। कोच के अनुसार, एशियन गेम्स में प्रतिस्पर्धा का स्तर बहुत ऊंचा होता है और इस मंच पर पदक जीतना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है।
मीराबाई ने बताया कि एशियन गेम्स की तैयारी के दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को तैयार रखने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने कहा कि कोच के साथ उनका तालमेल और उनकी रणनीतियां ही उन्हें पोडियम तक ले जाने में सफल रहीं।
साक्षात्कार के दौरान मीराबाई ने अपने प्रशंसकों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि देशवासियों का प्यार और समर्थन उन्हें हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह मेडल उन सभी लोगों को समर्पित है जिन्होंने उन पर विश्वास बनाए रखा।
कोच विजय शर्मा ने मीराबाई के अनुशासन की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मीराबाई की सीखने की इच्छा और हर दिन बेहतर करने का जज्बा ही उन्हें एक चैंपियन बनाता है। कोच ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में मीराबाई और भी कई बड़े कीर्तिमान स्थापित करेंगी।
यह जीत न केवल मीराबाई के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
अंत में, मीराबाई ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य और भी बड़े टूर्नामेंट्स में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखने और अपनी कमियों पर काम करने का संकल्प लिया है। कोच और खिलाड़ी की यह जोड़ी भविष्य में और भी सफलताएं हासिल करने के लिए तैयार है।
