एशियाई खेलों में भारतीय मुक्केबाज जादूमणि सिंह का सफर समाप्त, ओलंपिक पदक विजेता से मिली हार
एशियाई खेलों में भारत की मुक्केबाजी चुनौती को उस समय बड़ा झटका लगा जब जादूमणि सिंह बाहर हो गए। राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीत चुके जादूमणि को पुरुषों के 55 किग्रा भार वर्ग के मुकाबले में फिलीपींस के अनुभवी मुक्केबाज कार्लो पालाम के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। ओलंपिक रजत पदक विजेता पालाम ने इस मुकाबले में 0-3 से जीत दर्ज की, जिससे भारतीय खिलाड़ी का पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया।
VIMARSHNAARAD TVएशियाई खेलों के मुक्केबाजी रिंग से भारत के लिए निराशाजनक खबर सामने आई है। पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे जादूमणि सिंह का अभियान टूर्नामेंट के शुरुआती चरणों में ही थम गया है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय मुक्केबाज को एक कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।
जादूमणि सिंह का सामना फिलीपींस के दिग्गज मुक्केबाज कार्लो पालाम से था। पालाम की ख्याति टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी अधिक है। अपने अनुभव और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पालाम ने भारतीय चुनौती को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया।
मैच के दौरान दोनों मुक्केबाजों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन अंततः परिणाम फिलीपींस के खिलाड़ी के पक्ष में रहा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कार्लो पालाम ने यह मुकाबला 0-3 के अंतर से अपने नाम किया। इस हार के साथ ही जादूमणि का एशियाई खेलों में पदक जीतने का लक्ष्य समाप्त हो गया है।
जादूमणि सिंह इससे पहले राष्ट्रमंडल खेलों में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। उन खेलों में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी पहचान एक होनहार मुक्केबाज के रूप में बनाई थी। हालांकि, एशियाई खेलों के इस बड़े मंच पर उन्हें एक बेहद अनुभवी प्रतिद्वंद्वी का सामना करना पड़ा, जो उनके लिए भारी साबित हुआ।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि ओलंपिक स्तर के खिलाड़ी के खिलाफ खेलना किसी भी मुक्केबाज के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। पालाम की फुर्ती और सटीक प्रहारों ने जादूमणि को अंक हासिल करने के सीमित मौके दिए। भारतीय खेमे के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि जादूमणि से पदक की उम्मीदें लगाई जा रही थीं।
एशियाई खेलों में मुक्केबाजी की स्पर्धाएं काफी प्रतिस्पर्धी होती हैं और यहां हर मुकाबला खिलाड़ी के कौशल की परीक्षा लेता है। जादूमणि के बाहर होने से भारतीय मुक्केबाजी दल की पदक तालिका में इजाफा करने की संभावनाओं पर असर पड़ा है। अब प्रशंसकों की नजरें अन्य भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन पर टिकी हैं।
इस हार के बावजूद जादूमणि का पिछला प्रदर्शन उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर इशारा करता है। खेल जगत में जीत और हार एक सिक्के के दो पहलू हैं, और इस अनुभव से सीखकर वह भविष्य की प्रतियोगिताओं में वापसी करने का प्रयास करेंगे। फिलहाल, एशियाई खेलों में उनका सफर यहीं समाप्त हो गया है।