एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद शेफाली वर्मा ने साझा किया टीम से बाहर होने का दर्द
एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय महिला क्रिकेटर शेफाली वर्मा ने टीम से बाहर रहने के दौरान के अपने संघर्षों के बारे में बात की। एनडीटीवी इंडिया के अनुसार, शेफाली ने बताया कि टीम से बाहर होने के बाद वह काफी दुखी थीं, लेकिन उन्होंने खुद को साबित करने की जिद बनाए रखी। उन्होंने यह भी कहा कि वनडे विश्व कप के बाद महिला क्रिकेट का स्तर काफी ऊंचा हुआ है।
VIMARSHNAARAD TVएशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी शेफाली वर्मा ने अपने करियर के कठिन दौर को याद किया। उन्होंने बताया कि जब उन्हें टीम से बाहर किया गया था, तब वह मानसिक रूप से काफी परेशान थीं।
एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शेफाली ने कहा कि टीम से बाहर होने का अनुभव उनके लिए बहुत दर्दनाक था। उन्होंने स्वीकार किया कि उस दौरान उनकी आंखों में आंसू थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
शेफाली ने बताया कि उस समय उनके मन में केवल एक ही लक्ष्य था कि वह खुद को बेहतर साबित करें। वह दुनिया को यह दिखाना चाहती थीं कि वह भारतीय टीम के लिए सबसे उपयुक्त खिलाड़ी हैं।
अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने वापसी की और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा बनीं। यह जीत उनके लिए व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों स्तरों पर बहुत मायने रखती है।
शेफाली ने महिला क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वनडे विश्व कप जीतने के बाद से महिला क्रिकेट का स्तर काफी ऊपर गया है और खेल में काफी सुधार आया है।
उन्होंने कहा कि अब महिला क्रिकेट को पहले से कहीं अधिक पहचान मिल रही है। इस बदलाव ने खिलाड़ियों को और अधिक मेहनत करने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है।
शेफाली का मानना है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि टीम की हर खिलाड़ी देश के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रतिबद्ध है।
एशियाई खेलों में मिली यह सफलता भारतीय महिला क्रिकेट के लिए एक मील का पत्थर है। शेफाली वर्मा जैसे खिलाड़ियों का जज्बा टीम को भविष्य में और भी बड़ी ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेगा।