एशियाड से पहले हॉकी इंडिया में फिर बढ़ा विवाद, अधिकारियों के बीच ईमेल के जरिए तनातनी
जापान में होने वाले एशियाड से ठीक पहले हॉकी इंडिया के भीतर एक बार फिर आंतरिक कलह सामने आई है। वर्ल्ड कप के दौरान जर्सी विवाद के बाद अब अधिकारियों के बीच ईमेल के जरिए तीखी बहस जगजाहिर हो गई है। इस आपसी खींचतान ने खेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे आगामी टूर्नामेंट की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जापान में आयोजित होने वाले एशियाड खेलों से पहले हॉकी इंडिया में एक बार फिर विवादों ने जोर पकड़ लिया है। खेल के मैदान से ज्यादा अब हॉकी इंडिया के अधिकारियों के बीच की आपसी तनातनी चर्चा का विषय बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों के बीच ईमेल के जरिए हो रही बहस अब सार्वजनिक हो चुकी है। यह पहली बार नहीं है जब हॉकी इंडिया के भीतर इस तरह की खींचतान देखने को मिली है। इससे पहले वर्ल्ड कप के दौरान जर्सी विवाद ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
वर्ल्ड कप में मिली हार से सबक लेने के बजाय, हॉकी इंडिया के अधिकारी फिर से आपसी विवादों में उलझे हुए हैं। इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
एशियाड जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट से ठीक पहले इस तरह की आंतरिक कलह टीम के मनोबल पर बुरा असर डाल सकती है। खिलाड़ियों की तैयारियों के बजाय अधिकारियों का ध्यान आपसी झगड़ों पर केंद्रित होना खेल प्रेमियों के लिए चिंता का विषय है।
ईमेल के जरिए हुई इस तनातनी ने हॉकी इंडिया की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खेल प्रशासन में पारदर्शिता और अनुशासन की कमी को लेकर अब कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हॉकी इंडिया के अधिकारियों के बीच का यह माथा-फुटौव्वल खेल के विकास में बाधा बन रहा है। यदि समय रहते इस विवाद को नहीं सुलझाया गया, तो इसका सीधा असर एशियाड में भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
फिलहाल, इस मामले पर आधिकारिक तौर पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। खेल जगत में इस बात की चर्चा है कि क्या अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को भूलकर केवल व्यक्तिगत मतभेदों में उलझे हुए हैं।
आगामी एशियाड खेलों में भारतीय हॉकी टीम की सफलता के लिए एक शांत और अनुशासित वातावरण की आवश्यकता है। ऐसे में अधिकारियों का यह व्यवहार टीम के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
