एससीओ शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शहबाज शरीफ का आमना-सामना, कूटनीतिक हलचल तेज
एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच मुलाकात की संभावना है। एनडीटीवी इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चीन, रूस और भारत इस आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां कर रहे हैं। इस बीच, जामिया मिलिया इस्लामिया की शोधकर्ता अनुसूआ गांगुली ने मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों में भौगोलिक चुनौतियों को दूर करने पर जोर दिया है।
VIMARSHNAARAD TVशंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एक-दूसरे के आमने-सामने आने की उम्मीद है। इस सम्मेलन को लेकर भारत, चीन और रूस ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
एनडीटीवी इंडिया के अनुसार, यह शिखर सम्मेलन वैश्विक राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सदस्य देशों के प्रमुखों की मौजूदगी में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के नेताओं के बीच किसी औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन उनकी उपस्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।
इस सम्मेलन के संदर्भ में क्षेत्रीय सहयोग और कनेक्टिविटी पर भी चर्चा हो सकती है। जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की रिसर्च स्कॉलर अनुसूआ गांगुली ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने कहा कि मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के जुड़ाव को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
गांगुली के अनुसार, मध्य एशिया के साथ भारत के संबंधों में सबसे बड़ी बाधा भौगोलिक दूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समस्या का समाधान ढूंढना भारत की कूटनीतिक प्राथमिकता होनी चाहिए। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी सुगम होगा।
एससीओ के मंच का उपयोग सदस्य देश अपने आपसी हितों को साधने के लिए करते हैं। भारत के लिए यह एक अवसर है कि वह मध्य एशिया के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करे। रूस और चीन की भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है।
सुरक्षा और आर्थिक सहयोग एससीओ के मुख्य स्तंभ रहे हैं। इस बार के शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, कट्टरपंथ और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। सदस्य देश इन चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर विचार कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, यह शिखर सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय संबंधों के दृष्टिकोण से काफी अहम है। दुनिया भर के विश्लेषक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि इस मंच से क्या नए कूटनीतिक संकेत मिलते हैं। भारत की ओर से इस सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधिमंडल की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।