ओटीटी सेंसरशिप और परवरिश पर अभिनेत्री हरलीन सेठी ने रखी अपनी बेबाक राय
अभिनेत्री हरलीन सेठी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप की आवश्यकता और बच्चों की परवरिश में माता-पिता की भूमिका पर अपने विचार साझा किए हैं। अपने एक दशक लंबे करियर में 'कोहरा' और 'ब्रोकन बट ब्यूटीफुल' जैसे चर्चित प्रोजेक्ट्स में काम कर चुकीं हरलीन का मानना है कि हर बात के लिए अभिभावकों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने डिजिटल कंटेंट के प्रति एक संतुलित नजरिया अपनाने की वकालत की है।

पिछले एक दशक से मनोरंजन जगत में सक्रिय अभिनेत्री हरलीन सेठी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद कंटेंट और सेंसरशिप के मुद्दे पर खुलकर बात की है। उन्होंने अपने अभिनय सफर में 'सुल्तान ऑफ दिल्ली', 'शक: ट्रस्ट नो वन' और 'ब्रोकन बट ब्यूटीफुल' जैसे कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में काम किया है। हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने डिजिटल माध्यमों पर बढ़ती चर्चाओं के बीच अपनी राय रखी।
हरलीन ने स्पष्ट किया कि ओटीटी पर सेंसरशिप को लेकर चल रही बहस के बीच यह समझना जरूरी है कि दर्शक क्या देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर चीज के लिए माता-पिता को जिम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, बच्चों को क्या देखना चाहिए और क्या नहीं, इसका निर्णय लेने में अभिभावकों की भूमिका तो है, लेकिन हर गतिविधि पर नियंत्रण रखना संभव नहीं है।
अभिनेत्री ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल युग में कंटेंट की विविधता बहुत अधिक है। ऐसे में दर्शकों को खुद भी जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने माना कि ओटीटी पर सेंसरशिप का विषय जटिल है और इसके लिए एक संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत है, ताकि रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच तालमेल बना रहे।
अपने करियर के बारे में बात करते हुए हरलीन ने बताया कि उन्होंने 'कोहरा' जैसे गंभीर विषयों वाले प्रोजेक्ट्स में काम करके अपनी अभिनय क्षमता को निखारा है। उन्होंने कहा कि ओटीटी ने उन्हें अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का मौका दिया है, जो उन्हें एक कलाकार के रूप में संतुष्टि प्रदान करते हैं।
अंत में, हरलीन ने कहा कि मनोरंजन का माध्यम चाहे कोई भी हो, अंततः दर्शकों की पसंद और समझ ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर और भी बेहतर और सार्थक कंटेंट देखने को मिलेगा, जो दर्शकों के साथ-साथ समाज के लिए भी प्रासंगिक होगा।
