ताज़ा अपडेटओणम 2026: दिल्ली में भी महसूस करें केरल की रौनक, पारंपरिक साध्या और पकवानों की धूम
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ओणम 2026: दिल्ली में भी महसूस करें केरल की रौनक, पारंपरिक साध्या और पकवानों की धूम

ओणम के अवसर पर दिल्ली में भी केरल जैसी संस्कृति और उत्सव का अनुभव किया जा सकता है। शहर के मंदिरों में ओणम की विशेष रौनक देखने को मिलती है। इसके अलावा, लोग घर पर पारंपरिक केरल पकवानों जैसे ओणम साध्या तैयार कर रहे हैं, जिसमें केले के पत्ते पर 26 तरह के व्यंजन परोसे जाते हैं।

ओणम 2026: दिल्ली में भी महसूस करें केरल की रौनक, पारंपरिक साध्या और पकवानों की धूम
लाइसेंस प्राप्त विषय चित्र: George Augustine · CC BY 2.0 · Openverse

ओणम का त्योहार केरल की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। इस वर्ष ओणम 2026 के अवसर पर, दिल्ली जैसे शहरों में भी केरल जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। शहर के कई मंदिरों में विशेष आयोजन किए गए हैं, जहाँ लोग दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक देख सकते हैं।

ओणम के दौरान सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण 'ओणम साध्या' है। यह एक पारंपरिक दावत है जिसे केले के पत्ते पर परोसा जाता है। इसमें लगभग 26 प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन शामिल होते हैं, जो इस त्योहार की भव्यता को दर्शाते हैं।

साध्या की परंपरा राजा महाबली की पौराणिक कथा से जुड़ी है। माना जाता है कि ओणम के दौरान राजा महाबली अपनी प्रजा से मिलने आते हैं, और उनके स्वागत में यह भव्य भोज आयोजित किया जाता है।

दिल्ली में रहने वाले केरल के लोग और अन्य समुदाय भी इस त्योहार को बड़े उत्साह के साथ मना रहे हैं। मंदिरों में होने वाली सजावट और सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों को केरल की याद दिलाते हैं।

घर पर मेहमानों के स्वागत के लिए लोग विशेष रूप से केरल के पारंपरिक पकवान बना रहे हैं। इनमें विभिन्न प्रकार की सब्जियां, चावल और नारियल आधारित व्यंजन शामिल हैं, जो स्वाद और स्वास्थ्य का अनूठा संगम हैं।

ओणम का त्योहार न केवल भोजन के लिए, बल्कि सामुदायिक एकता और खुशी के लिए भी जाना जाता है। यह समय परिवारों के एक साथ आने और पुरानी परंपराओं को निभाने का है।

यदि आप दिल्ली में हैं और केरल जैसा अनुभव चाहते हैं, तो स्थानीय मंदिरों में जाकर ओणम के उत्सव में शामिल हो सकते हैं। यह न केवल एक धार्मिक अनुभव है, बल्कि दक्षिण भारतीय संस्कृति को करीब से जानने का अवसर भी है।

ओणम साध्या की तैयारी में मेहनत और समर्पण की आवश्यकता होती है। प्रत्येक व्यंजन का अपना महत्व है और इसे एक निश्चित क्रम में परोसा जाता है, जो इस परंपरा को और भी खास बनाता है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01ndtv.inमूल रिपोर्ट देखें ↗02India.comमूल रिपोर्ट देखें ↗03News18 Hindiमूल रिपोर्ट देखें ↗