अनुसूचित जाति की महिला उद्यमी ने कचरे से कमाई का मॉडल अपनाकर रबर रीसाइक्लिंग में सफलता पाई
आंध्र प्रदेश की उद्यमी श्रीमती स्वर्णलता नेथिपुडी ने अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष (VCF-SC) की मदद से एक सफल रबर रीसाइक्लिंग संयंत्र स्थापित किया है। यह उद्यम बेकार टायरों को औद्योगिक कच्चे माल में बदलकर पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास में योगदान दे रहा है।

विशाखापत्तनम की रहने वाली श्रीमती स्वर्णलता नेथिपुडी ने नवाचार और संस्थागत सहायता के माध्यम से एक प्रेरणादायक व्यावसायिक उदाहरण पेश किया है। अनुसूचित जाति समुदाय की पहली पीढ़ी की महिला उद्यमी के रूप में, उन्होंने 'स्वर्णकरुणा प्रिंसटन रबर इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड' की स्थापना की। उनकी यह यात्रा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के 'अनुसूचित जातियों के लिए उद्यम पूंजी कोष' (VCF-SC) के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।
इस कंपनी ने बेकार टायरों को उच्च-गुणवत्ता वाले क्रंब रबर पाउडर में बदलने के लिए एक स्वचालित संयंत्र स्थापित किया है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 6,000 मीट्रिक टन है। यह परियोजना न केवल टायरों के निपटान की समस्या का समाधान करती है, बल्कि चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को भी बढ़ावा देती है।
वर्ष 2023 में, VCF-SC ने इस उद्यम को 5 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। इस पूंजी ने कंपनी को उन्नत बुनियादी ढांचा विकसित करने और एसआईडीबीआई से अतिरिक्त वित्तपोषण प्राप्त करने में मदद की। इस सहयोग से कंपनी ने दो लाख से अधिक बेकार टायरों को रीसायकल करने की क्षमता हासिल की है।
वर्तमान में, इस उद्यम ने 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया है। कंपनी ने अब तक 4.36 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है और 4.60 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है। टीवीएस सुंदरम और हिन्कोल जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ साझेदारी ने इसकी बाजार स्थिति को और मजबूत किया है।
श्रीमती स्वर्णलता नेथिपुडी ने बताया कि सरकारी सहायता ने उन्हें एक पर्यावरणीय चुनौती को स्थायी व्यावसायिक अवसर में बदलने में सक्षम बनाया। यह सफलता दर्शाती है कि लक्षित वित्तीय सहायता कैसे अनुसूचित जाति के उद्यमियों को उभरते क्षेत्रों में अभिनव और टिकाऊ व्यवसाय स्थापित करने में मदद कर सकती है।
