कर्ज वसूली में फिसड्डी साबित हुआ लीड बैंक, 2,846 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज से बढ़ी चिंता
उत्तर प्रदेश के आगरा में लीड बैंक कर्ज वसूली के मामले में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला बैंक बनकर उभरा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 1.69 लाख खातों में कुल 2,846 करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। इसमें केनरा बैंक का हिस्सा सबसे अधिक 762 करोड़ रुपये है। कृषि और एमएसएमई जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सरकारी बैंकों की वसूली दर काफी निराशाजनक रही है।
VIMARSHNAARAD TVआगरा में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले का लीड बैंक कर्ज वसूली के मामले में सबसे फिसड्डी साबित हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, जिले के करीब 1.69 लाख खातों में 2,846 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि फंसी हुई है, जिसे वसूलने में बैंक विफल रहे हैं।
इस स्थिति का सबसे बड़ा असर कृषि और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर पड़ा है। इन क्षेत्रों में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन कर्ज वसूली के मामले में काफी पीछे रहा है। बैंकों की इस सुस्ती के कारण वित्तीय प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है और एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) की समस्या गंभीर होती जा रही है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से केनरा बैंक का उल्लेख किया गया है, जिसका 762 करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। यह आंकड़ा जिले के कुल फंसे हुए कर्ज का एक बड़ा हिस्सा है। अन्य सरकारी बैंकों की स्थिति भी इससे बहुत अलग नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कर्ज वसूली की प्रक्रिया में बड़ी खामियां हैं।
बैंकों की इस विफलता के कारण न केवल वित्तीय नुकसान हो रहा है, बल्कि नए उद्यमियों और किसानों को ऋण मिलने में भी कठिनाई आ रही है। जब पुराने कर्ज वापस नहीं आते, तो बैंकों की नई ऋण देने की क्षमता सीमित हो जाती है, जिसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जा रहा है। लीड बैंक की इस खराब कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी राशि को वसूलने के लिए अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। बैंकों को अब अपनी वसूली प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी बैंकों में जवाबदेही की कमी और वसूली के लिए अपनाई जाने वाली पुरानी पद्धतियां इस समस्या का मुख्य कारण हैं। यदि समय रहते इन ऋणों की वसूली नहीं की गई, तो यह राशि और भी बढ़ सकती है, जिससे बैंकों की वित्तीय सेहत पर बुरा असर पड़ेगा।
आगरा के बैंकिंग परिदृश्य में यह स्थिति एक चेतावनी की तरह है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अब बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने और कर्ज वसूली के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि फंसी हुई पूंजी को वापस लाया जा सके।
कुल मिलाकर, 2,846 करोड़ रुपये का फंसा हुआ कर्ज जिले के बैंकिंग तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक इस स्थिति से निपटने के लिए क्या ठोस रणनीति अपनाते हैं और वसूली की दर में कितना सुधार ला पाते हैं।