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कागजी पार्टियों को चंदा मिलने के मामले में राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की प्रतिक्रिया

बीबीसी की एक हालिया जांच में कागजी राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का मुद्दा सामने आया है। इस रिपोर्ट के बाद विपक्षी नेताओं ने विस्तृत जांच की मांग की है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। राजनीतिक विश्लेषक भी इस मामले को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक मान रहे हैं।

बीबीसी की एक पड़ताल ने राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के पारदर्शी होने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में उन 'कागजी' या निष्क्रिय राजनीतिक दलों का जिक्र किया गया है, जिन्हें भारी मात्रा में चंदा मिल रहा है। इस खुलासे के बाद देश की राजनीति में हलचल मच गई है।

विपक्ष के कई नेताओं ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि चंदे के नाम पर हो रही इस कथित धांधली की तह तक जाना जरूरी है।

राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग इस मामले में मूकदर्शक बना हुआ है और उसे अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा सीधे तौर पर चुनावी पारदर्शिता और लोकतंत्र की सेहत से जुड़ा है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि कागजी पार्टियों को चंदा मिलता रहेगा, तो यह चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमजोर करेगा।

रिपोर्ट सामने आने के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां एक पक्ष इसे बड़ा घोटाला बता रहा है, वहीं दूसरे पक्ष ने इस पर चुप्पी साधे रखी है या इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।

चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत जवाब नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में आयोग की कार्यप्रणाली पर बहस तेज हो गई है।

यह मामला केवल चंदे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनावी फंडिंग के नियमों में सुधार की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानूनों की जरूरत है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद में भी हंगामा होने की संभावना है। जनता भी अब यह जानना चाहती है कि आखिर इन कागजी पार्टियों के पीछे कौन है और यह पैसा कहां से आ रहा है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗