कानपुर आरटीओ के निलंबित कर्मचारियों पर विभागीय जांच का शिकंजा, दलालों से संबंधों की होगी गहन पड़ताल
कानपुर आरटीओ कार्यालय में निलंबित किए गए दो लिपिकों, विपिन और मधुर मिश्रा के विरुद्ध विभागीय जांच प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। उप परिवहन आयुक्त न्यायाधिकरण को इस मामले की जांच का दायित्व सौंपा गया है। जांच के दायरे में न केवल नकद लेनदेन और रसीदों का मिलान होगा, बल्कि कार्यालय में सक्रिय दलालों के साथ इन कर्मचारियों के कथित गठजोड़ की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
VIMARSHNAARAD TVकानपुर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में तैनात दो लिपिकों, विपिन और मधुर मिश्रा की मुश्किलें और अधिक बढ़ गई हैं। इन दोनों कर्मचारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, और अब उनके खिलाफ औपचारिक विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य उन आरोपों की सत्यता का पता लगाना है, जिनके कारण उन्हें सेवा से हटाया गया था।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस संवेदनशील मामले की जांच का जिम्मा उप परिवहन आयुक्त न्यायाधिकरण को सौंपा गया है। न्यायाधिकरण अब इन दोनों लिपिकों के कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों का बारीकी से विश्लेषण करेगा। जांच का दायरा काफी विस्तृत रखा गया है ताकि किसी भी अनियमितता को अनदेखा न किया जाए।
जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बिंदु कार्यालय में होने वाले नकद लेनदेन और जारी की गई रसीदों का मिलान करना होगा। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय रिकॉर्ड में हेरफेर की संभावनाओं को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है। इसलिए, रसीद बुक और बैंक खातों के मिलान को प्राथमिकता दी जा रही है।
इसके अतिरिक्त, आरटीओ कार्यालय में लंबे समय से सक्रिय दलालों के नेटवर्क पर भी जांच की आंच पहुंचेगी। यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि क्या इन निलंबित कर्मचारियों की दलालों के साथ कोई मिलीभगत थी, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा हो।
विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही भविष्य में इन कर्मचारियों के खिलाफ आगे की दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल, विभाग ने इस मामले में पूरी पारदर्शिता बरतने का आश्वासन दिया है ताकि कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जा सके।
यह कार्रवाई आरटीओ कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद की गई है। स्थानीय स्तर पर इस जांच को विभाग की छवि सुधारने के एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। जांच अधिकारी जल्द ही अपनी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेंगे।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस जांच से विभाग के अन्य कर्मचारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। सभी की नजरें अब न्यायाधिकरण की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इन लिपिकों के भविष्य का निर्धारण करेगी।