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कानपुर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला: एयरबैग न खुलने पर कार कंपनी को देना होगा हर्जाना

कानपुर में एक सड़क हादसे के दौरान कार का एयरबैग नहीं खुलने से मालिक के बेटे की मौत हो गई थी। इस मामले में उपभोक्ता आयोग ने आरएनजी ऑटो मोबाइल्स को सेवा में खामी का दोषी पाया है। आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह बीमा राशि के रूप में छह लाख रुपये से अधिक की रकम आठ प्रतिशत ब्याज के साथ पीड़ित परिवार को लौटाए।

कानपुर के उपभोक्ता फोरम ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कार निर्माता कंपनी को लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया है। मामला एक दुखद सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें कार का एयरबैग समय पर नहीं खुला और कार मालिक के बेटे की जान चली गई। इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था।

आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे सेवा में स्पष्ट कमी माना है। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि सुरक्षा मानकों में इस तरह की चूक उपभोक्ता के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। कार में सुरक्षा फीचर के रूप में एयरबैग का होना अनिवार्य है और दुर्घटना के समय इसका काम न करना एक गंभीर तकनीकी विफलता है।

अदालत ने आरएनजी ऑटो मोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वे बीमा क्लेम की राशि के तौर पर छह लाख 36 हजार 794 रुपये का भुगतान करें। यह राशि केवल मूलधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कंपनी को इस पर आठ प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना होगा।

यह फैसला उन सभी वाहन मालिकों के लिए एक नजीर है जो सुरक्षा फीचर्स पर भरोसा करके गाड़ियां खरीदते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि कंपनियां सुरक्षा उपकरणों के रखरखाव या गुणवत्ता में लापरवाही बरतती हैं, तो उन्हें कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

पीड़ित परिवार ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया है। हालांकि, कोई भी मुआवजा खोई हुई जान की भरपाई नहीं कर सकता, लेकिन आयोग का यह रुख कंपनियों को भविष्य में अधिक सतर्क रहने के लिए मजबूर करेगा।

कानपुर के इस मामले ने एक बार फिर ऑटोमोबाइल क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की जांच और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। उपभोक्ता आयोग का यह कड़ा रुख भविष्य में अन्य कंपनियों के लिए भी एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

आयोग ने कंपनी को एक निश्चित समय सीमा के भीतर यह पूरी राशि ब्याज सहित जमा करने का आदेश दिया है। इस आदेश के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗