ताज़ा अपडेटकानपुर: एआरटीओ आलोक कुमार सिंह ने निलंबन पर हाईकोर्ट से पाया स्टे, दफ्तर में की उपस्थिति
Vimarsh Naarad TV logoस्वतंत्र डिजिटल न्यूज़Vimarsh–Naarad TVखबर • विमर्श • जनता की आवाज़
डिजिटल संस्करणYouTube
समाचार श्रेणियां

कानपुर: एआरटीओ आलोक कुमार सिंह ने निलंबन पर हाईकोर्ट से पाया स्टे, दफ्तर में की उपस्थिति

कानपुर आरटीओ कार्यालय में छापेमारी के बाद निलंबित किए गए एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से निलंबन पर स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है। शनिवार को वह कार्यालय पहुंचे और कुछ घंटे बिताए। हालांकि, आरटीओ का कहना है कि उनकी कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय परिवहन मुख्यालय द्वारा लिया जाएगा।

कानपुर के आरटीओ कार्यालय में हाल ही में हुई प्रशासनिक और पुलिस छापेमारी के बाद एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया था। इस कार्रवाई के बाद अब मामला नया मोड़ ले चुका है। आलोक कुमार सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने निलंबन के खिलाफ स्थगन आदेश प्राप्त करने में सफल रहे।

शनिवार को स्थगन आदेश की प्रति लेकर आलोक कुमार सिंह आरटीओ कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने करीब तीन से चार घंटे का समय बिताया। हालांकि, इस दौरान उन्होंने कोई आधिकारिक कार्य नहीं किया। उनके कार्यालय में उपस्थित होने से विभाग में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

इस घटनाक्रम पर आरटीओ ने स्पष्ट किया है कि निलंबन के बाद कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया पूरी तरह से परिवहन मुख्यालय के अधिकार क्षेत्र में है। मुख्यालय ही यह तय करेगा कि उन्हें पुनः कार्यभार सौंपा जाएगा या नहीं।

गौरतलब है कि आरटीओ कार्यालय में छापेमारी के बाद से ही विभाग में हड़कंप मचा हुआ था। इस छापेमारी में कई अनियमितताओं की आशंका जताई गई थी, जिसके बाद एआरटीओ प्रशासन पर गाज गिरी थी।

हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद अब सबकी निगाहें परिवहन मुख्यालय के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यालय इस कानूनी स्थगन आदेश के बाद क्या निर्णय लेता है।

फिलहाल, आलोक कुमार सिंह की कार्यालय में मौजूदगी और आरटीओ की प्रतिक्रिया ने स्थिति को स्पष्ट कर दिया है कि कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ विभागीय नियमों का पालन किया जाना अनिवार्य है।

कानपुर आरटीओ कार्यालय में हुई इस पूरी घटना ने स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग के कामकाज को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मामले का अंतिम निपटारा मुख्यालय के निर्देशों पर ही निर्भर करेगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗