कानपुर की बंद मिलों को पुनर्जीवित करने के लिए सांसद रमेश अवस्थी ने आईआईटी से मांगा नया रोड मैप
कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने आईआईटी निदेशक से मुलाकात कर एनटीसी और बीआईसी की बंद पड़ी मिलों की परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर चर्चा की। उन्होंने इन औद्योगिक इकाइयों को फिर से सक्रिय करने के लिए संस्थान से एक प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का आग्रह किया है। इस पहल का उद्देश्य शहर के औद्योगिक गौरव को वापस लाना और बंद पड़ी मिलों की जमीन का सदुपयोग करना है।
VIMARSHNAARAD TVकानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने शहर की बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने हाल ही में आईआईटी कानपुर के निदेशक से भेंट की और एनटीसी (नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन) तथा बीआईसी (ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन) की मिलों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। इन मिलों के लंबे समय से बंद होने या सीमित गतिविधियों के कारण शहर का औद्योगिक ढांचा प्रभावित हुआ है।
सांसद ने आईआईटी प्रशासन से इन परिसंपत्तियों के पुनरुद्धार के लिए एक नया और व्यावहारिक रोड मैप तैयार करने का अनुरोध किया है। उनका मानना है कि तकनीकी संस्थान की विशेषज्ञता का उपयोग करके इन बंद मिलों की जमीन और संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। यह प्रयास शहर में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
बैठक के दौरान, सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि कानपुर के औद्योगिक इतिहास को देखते हुए इन मिलों का पुनरुद्धार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आईआईटी के विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे ऐसी योजना बनाएं जो न केवल आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो, बल्कि शहर के भविष्य के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो।
आईआईटी कानपुर के साथ इस सहयोग का उद्देश्य इन मिलों की परिसंपत्तियों को एक नई पहचान देना है। सांसद का मानना है कि यदि इन संसाधनों का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो कानपुर एक बार फिर औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकता है।
फिलहाल, इस प्रस्ताव पर आईआईटी की ओर से विस्तृत कार्ययोजना तैयार किए जाने की उम्मीद है। सांसद ने विश्वास जताया है कि तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से इन बंद पड़ी इकाइयों को फिर से सक्रिय करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
यह पहल कानपुर के स्थानीय निवासियों और औद्योगिक जगत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। सांसद रमेश अवस्थी लगातार शहर के विकास और बंद पड़ी इकाइयों को फिर से शुरू करने के लिए प्रयासरत हैं।
आने वाले समय में इस रोड मैप के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। प्रशासन और तकनीकी संस्थान के बीच का यह समन्वय कानपुर के औद्योगिक पुनरुद्धार में मील का पत्थर साबित हो सकता है।