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कानपुर के पुरवामीर गांव में 18 वर्षीय यशी का अंतिम संस्कार, रक्षाबंधन की आखिरी याद बनी शोक

कानपुर के पुरवामीर गांव में रक्षाबंधन के मौके पर भाई से कुछ दिन रुकने की जिद करने वाली 18 वर्षीय यशी का शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा। शनिवार दोपहर को जब यशी का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, तो वहां कोहराम मच गया। जिस आंगन में यशी ने अपना बचपन बिताया था, उसी में उसे अंतिम विदाई दी गई। इस घटना से पूरे गांव में गहरा शोक व्याप्त है।

कानपुर के पुरवामीर गांव में शनिवार का दिन बेहद दुखद रहा। रक्षाबंधन के त्योहार पर अपने भाई से कुछ दिन रुकने की जिद करने वाली 18 वर्षीय यशी अब हमारे बीच नहीं रही। पोस्टमार्टम के बाद शनिवार दोपहर करीब दो बजे जब यशी का शव गांव पहुंचा, तो वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं।

यशी के निधन की खबर सुनते ही पूरे गांव में मातम पसर गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यशी के भाई के साथ हुई उसकी आखिरी बातचीत अब परिवार के लिए एक टीस बन गई है। रक्षाबंधन के दिन उसने अपने भाई से आग्रह किया था कि अगली बार जब वह घर आए, तो कुछ दिन साथ बिताए।

यह मासूम सी जिद अब परिवार के लिए एक आखिरी याद बनकर रह गई है। जिस आंगन में यशी ने अपना बचपन खेला और बड़ी हुई, उसी आंगन में उसे अंतिम विदाई दी गई। इस हृदयविदारक दृश्य को देखकर गांव के लोग भी अपने आंसू नहीं रोक पाए।

यशी के अंतिम संस्कार के दौरान पूरा गांव शोक में डूबा रहा। स्थानीय लोगों ने बताया कि यशी का जाना पूरे परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया गया था।

अंतिम संस्कार के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिजन उपस्थित थे। हर कोई यशी के परिवार को सांत्वना देने का प्रयास कर रहा था, लेकिन दुख का पहाड़ इतना बड़ा था कि उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था।

यशी के जाने से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग अभी भी इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि जिस बेटी ने कुछ दिन पहले ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया था, वह अब इस दुनिया में नहीं है।

परिजनों ने बताया कि यशी का स्वभाव बहुत मिलनसार था। उसकी यादें अब केवल तस्वीरों और उन बातों में सिमट कर रह गई हैं जो उसने अपने भाई से कही थीं। पूरा गांव इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ा है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗