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कानपुर चिड़ियाघर में नौ साल के लंबे इंतजार के बाद दुर्लभ बटागुर कछुओं के 25 बच्चों का जन्म

कानपुर चिड़ियाघर में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है, जहां नौ साल के लंबे अंतराल के बाद दुर्लभ बटागुर प्रजाति के 25 कछुओं का जन्म हुआ है। इस सफलता के साथ ही चिड़ियाघर में इन कछुओं की कुल संख्या 18 से बढ़कर 43 हो गई है। यह घटना संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

कानपुर चिड़ियाघर के लिए यह एक बेहद खुशी का मौका है। लंबे समय से जिस पल का इंतजार किया जा रहा था, वह आखिरकार पूरा हो गया है। चिड़ियाघर प्रशासन ने जानकारी दी है कि दुर्लभ और अत्यंत संकटग्रस्त माने जाने वाले बटागुर कछुओं के अंडों से 25 बच्चों ने जन्म लिया है। यह उपलब्धि चिड़ियाघर के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की दिशा में एक बड़ी सफलता के रूप में देखी जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, पिछले नौ वर्षों से इन कछुओं के प्रजनन को लेकर चिड़ियाघर में विशेष प्रयास किए जा रहे थे। इस सफलता से पहले चिड़ियाघर में बटागुर कछुओं की संख्या केवल 18 थी। अब इन 25 नए मेहमानों के आने के बाद इनकी कुल संख्या बढ़कर 43 हो गई है।

बटागुर कछुए अपनी दुर्लभता के कारण वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच हमेशा चर्चा का विषय रहते हैं। इनके संरक्षण के लिए विशेष वातावरण और देखभाल की आवश्यकता होती है। चिड़ियाघर के विशेषज्ञों ने इन कछुओं के प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार की थीं, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आया है।

चिड़ियाघर प्रबंधन ने बताया कि नवजात कछुओं की सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। उनकी सुरक्षा और खान-पान के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि वे स्वस्थ रूप से विकसित हो सकें। इन कछुओं का जन्म न केवल चिड़ियाघर के लिए बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी एक सकारात्मक संकेत है।

इस उपलब्धि के बाद चिड़ियाघर में उत्साह का माहौल है। बटागुर कछुओं की घटती आबादी को देखते हुए यह प्रजनन कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफलताएं लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होती हैं।

आने वाले समय में इन कछुओं के विकास के लिए और भी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। चिड़ियाघर प्रशासन ने इस सफलता का श्रेय अपनी टीम की कड़ी मेहनत और धैर्य को दिया है।

कानपुर चिड़ियाघर अब इन दुर्लभ कछुओं के संरक्षण के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर रहा है। आगंतुकों के लिए भी यह एक विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है, हालांकि फिलहाल इन बच्चों को विशेष निगरानी में रखा गया है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗