कानपुर: छह साल बाद विकास दुबे को मिला मृत्यु प्रमाण-पत्र, नगर निगम ने पूरी की कानूनी प्रक्रिया
कानपुर के चर्चित अपराधी विकास दुबे का एनकाउंटर करीब छह साल पहले हुआ था। अब नगर निगम ने आधिकारिक रूप से उसका मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी कर दिया है। आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी रहे दुबे की मौत के 2,256 दिन बाद यह कानूनी औपचारिकता पूरी हुई है। इस घटना ने लंबे समय से लंबित प्रशासनिक प्रक्रिया को समाप्त कर दिया है।
VIMARSHNAARAD TVकानपुर के कुख्यात अपराधी विकास दुबे का नाम अब आधिकारिक रूप से सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में आरोपी रहे दुबे के एनकाउंटर के लगभग छह साल बाद नगर निगम ने उसका मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी किया है। यह प्रक्रिया उसकी मृत्यु के 2,256 दिन बाद पूरी हुई है।
विकास दुबे का नाम राज्य के सबसे चर्चित अपराधियों में शामिल था। पुलिसकर्मियों पर हुए हमले के बाद वह लंबे समय तक चर्चा में रहा था। एनकाउंटर के बाद से ही उसके कानूनी अस्तित्व को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रही थीं, लेकिन अब नगर निगम द्वारा जारी प्रमाण-पत्र ने इस मामले को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है।
नगर निगम के अधिकारियों ने इस संबंध में आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी होने का अर्थ है कि अब सरकारी रिकॉर्ड में विकास दुबे का नाम मृत व्यक्तियों की सूची में दर्ज हो गया है। यह कदम प्रशासनिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जा रही है।
विकास दुबे की मौत के बाद से ही उसके परिवार और कानूनी मामलों से जुड़े कई दस्तावेज लंबित थे। मृत्यु प्रमाण-पत्र मिलने से अब इन मामलों के निपटारे में आसानी होगी। हालांकि, यह घटना छह साल पुरानी है, लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी होने में लंबा समय लगा।
स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है जो किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अपनाई जाती है। विकास दुबे के मामले में भी सभी आवश्यक साक्ष्यों और पुलिस रिपोर्ट के आधार पर ही यह प्रमाण-पत्र जारी किया गया है।
इस घटना ने एक बार फिर कानपुर के उस चर्चित कांड की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। आठ पुलिसकर्मियों की शहादत के बाद विकास दुबे का एनकाउंटर एक बड़ी खबर बनी थी।
अब जबकि मृत्यु प्रमाण-पत्र जारी हो चुका है, तो इस मामले से जुड़ी प्रशासनिक फाइलें पूरी तरह बंद मानी जा रही हैं। नगर निगम के इस कदम से कानूनी रूप से विकास दुबे के अस्तित्व का अंत आधिकारिक हो गया है।