कानपुर: ढाई करोड़ की रंगदारी मामले में एक और गवाह मुकरा, होटल मैनेजर ने आरोपों को नकारा
कानपुर के चर्चित ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी मामले में सुनवाई के दौरान एक और गवाह अपने बयानों से पीछे हट गया है। होटल कारोबारी सुरेश पाल के बाद अब उनके होटल के मैनेजर ने भी कोर्ट में अखिलेश और लवी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस घटनाक्रम से मामले की कानूनी कार्यवाही में नया मोड़ आ गया है।
VIMARSHNAARAD TVकानपुर में ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में कानूनी प्रक्रिया के दौरान एक महत्वपूर्ण गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, होटल कारोबारी सुरेश पाल के बाद अब उनके होटल के मैनेजर ने भी अदालत में गवाही देते समय आरोपों का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। मैनेजर ने अखिलेश और लवी पर लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है।
यह मामला तब चर्चा में आया था जब होटल कारोबारी सुरेश पाल ने अखिलेश और लवी के खिलाफ रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था। वादी का आरोप था कि आरोपियों ने उनसे बड़ी रकम की मांग की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान वादी खुद अपने बयानों से पलट गया था, जिसके बाद अब गवाहों के मुकरने का सिलसिला जारी है।
अदालत में पेश हुए मैनेजर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसने ऐसा कुछ नहीं देखा या सुना जिसके आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया जा सके। उसने अपने बयानों में आरोपियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है। इस गवाही के बाद बचाव पक्ष के वकीलों ने इसे अपने पक्ष में एक बड़ी राहत के रूप में देखा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य वादी और अब गवाहों के मुकरने से अभियोजन पक्ष की स्थिति कमजोर हो सकती है। जब गवाह अपने बयानों से पीछे हटते हैं, तो मामले की सच्चाई तक पहुंचना अदालत के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इस मामले में अब आगे की सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।
इस मामले में पहले भी कई बार सुनवाई हुई है, लेकिन गवाहों के पलटने से केस की दिशा बदलती नजर आ रही है। पुलिस और जांच एजेंसियों ने इस मामले में साक्ष्य जुटाने के लिए काफी मेहनत की थी, लेकिन गवाहों के बयानों में बदलाव ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया है।
अदालत अब इस मामले में अगली तारीख पर आगे की कार्यवाही करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि अभियोजन पक्ष इस स्थिति से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाता है। फिलहाल, आरोपियों के लिए यह घटनाक्रम काफी अनुकूल माना जा रहा है।
इस पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा पैदा कर दी है। लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या इस मामले में कोई ठोस निष्कर्ष निकल पाएगा या यह कानूनी दांव-पेच में उलझा रहेगा।