कानपुर नगर निगम सदन की बैठक में भारी हंगामा, पार्षदों के बीच हुई हाथापाई और गाली-गलौज
कानपुर नगर निगम की करीब दस महीने बाद आयोजित बैठक में जमकर बवाल हुआ। पार्षदों ने बदहाल सड़कों और जलभराव की समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान वार्डों में हस्तक्षेप के मुद्दे पर पार्षदों के बीच तीखी बहस, खींचतान और हाथापाई की स्थिति बन गई। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, सदन में गाली-गलौज तक की नौबत आ गई, जिससे कार्यवाही बाधित रही।
VIMARSHNAARAD TVकानपुर नगर निगम के सदन में शनिवार को आयोजित बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। करीब दस महीने के लंबे अंतराल के बाद बुलाई गई इस बैठक में पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। शहर की बदहाल सड़कों और जलभराव की गंभीर समस्याओं को लेकर पार्षदों ने सदन के भीतर जोरदार विरोध दर्ज कराया।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक की शुरुआत से ही माहौल तनावपूर्ण रहा। पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर अधिकारियों और अन्य सदस्यों को घेरा। चर्चा के दौरान वार्डों में हस्तक्षेप को लेकर पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
विवाद इतना बढ़ गया कि सदन में खींचतान और हाथापाई की स्थिति पैदा हो गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दौरान पार्षदों के बीच गाली-गलौज भी हुई, जिससे सदन की गरिमा तार-तार होती दिखी।
लंबे समय बाद बुलाई गई इस बैठक में विकास कार्यों और जनहित के मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद थी, लेकिन हंगामे के कारण कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। पार्षदों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से बैठक न होने के कारण समस्याओं का अंबार लग गया है।
नगर निगम के भीतर हुई इस घटना ने स्थानीय राजनीति में चर्चा छेड़ दी है। पार्षदों के इस आक्रामक रुख से स्पष्ट है कि शहर की बुनियादी सुविधाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
फिलहाल, इस हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रशासन और पार्षदों के बीच समन्वय की कमी इस घटना का मुख्य कारण मानी जा रही है।
कानपुर के नागरिक अब यह उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में होने वाली बैठकों में समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि शहर की बदहाल स्थिति में सुधार हो सके।