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कानपुर: मंत्री के दौरे के दौरान अनुपस्थित रहने और नोटिस की अनदेखी पर समाज कल्याण अधिकारी निलंबित

कानपुर के जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर को उनके पद से निलंबित कर दिया गया है। उन पर मंत्री के आधिकारिक दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन न करने और विभागीय जिम्मेदारियों से बचने का आरोप है। इसके अतिरिक्त, शासन द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब न देना भी उनके निलंबन का एक प्रमुख कारण बना है।

कानपुर में प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम सागर को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति उदासीनता बरतने के कारण निलंबित कर दिया गया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई मंत्री के आधिकारिक दौरे के दौरान अधिकारी की अनुपस्थिति के बाद की गई है।

बताया गया है कि जब राज्य के मंत्री कानपुर के दौरे पर थे, तब प्रोटोकॉल के तहत जिला समाज कल्याण अधिकारी का वहां उपस्थित होना अनिवार्य था। हालांकि, शिवम सागर ने इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया और कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। इस लापरवाही को शासन ने गंभीरता से लिया है।

इतना ही नहीं, इस घटना के बाद शासन की ओर से अधिकारी को स्पष्टीकरण के लिए नोटिस भी जारी किया गया था। सूत्रों के अनुसार, शिवम सागर ने इस नोटिस का जवाब देने की जहमत तक नहीं उठाई, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए। विभागीय निर्देशों की अनदेखी करना उनके लिए भारी पड़ गया।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे मंत्री के प्रोटोकॉल का पालन करें और विभागीय कार्यों में पूरी तत्परता दिखाएं। अधिकारी की ओर से लगातार की गई लापरवाही ने उच्च अधिकारियों को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

निलंबन की इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। अन्य अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है कि वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा के साथ करें। शासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

फिलहाल, शिवम सागर को उनके पद से हटा दिया गया है और मामले की आगे की विभागीय जांच जारी है। इस निलंबन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग में कामकाज की व्यवस्था को कैसे सुधारा जाता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

यह घटना सरकारी तंत्र में जवाबदेही और अनुशासन के महत्व को रेखांकित करती है। एक जिम्मेदार पद पर तैनात अधिकारी से उम्मीद की जाती है कि वह शासन के निर्देशों का पालन करे, लेकिन इस मामले में अधिकारी की विफलता ने उन्हें बड़ी मुसीबत में डाल दिया है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗