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कानपुर में नकली एंटी रैबीज वैक्सीन मामले की जांच तेज, ड्रग इंस्पेक्टरों ने पुलिस को सौंपे अहम दस्तावेज

कानपुर में सामने आए नकली एंटी रैबीज वैक्सीन प्रकरण में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। रविवार को ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल और देवयानी दुबे ने पुलिस के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। अधिकारियों ने विभागीय जांच के दौरान जुटाए गए फर्जी बिल और वैक्सीन की आपूर्ति से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जांच टीम को सौंपे हैं, जिससे मामले की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलेगी।

कानपुर में नकली एंटी रैबीज वैक्सीन के वितरण से जुड़े मामले में पुलिस की कार्रवाई ने गति पकड़ ली है। इस गंभीर प्रकरण की तह तक जाने के लिए रविवार को स्थानीय पुलिस ने ड्रग विभाग के अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। इस दौरान ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल और देवयानी दुबे ने जांच अधिकारियों के सामने उपस्थित होकर अपने बयान दर्ज कराए।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों ड्रग इंस्पेक्टरों ने विभागीय स्तर पर की गई अब तक की जांच के तथ्यों को साझा किया। उन्होंने पुलिस को बताया कि किस प्रकार से नकली वैक्सीन की आपूर्ति का जाल बिछाया गया था और इस दौरान किन-किन खामियों को चिन्हित किया गया है। यह जानकारी मामले की गंभीरता को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पूछताछ के दौरान ड्रग विभाग के अधिकारियों ने पुलिस को कई दस्तावेज भी सौंपे हैं। इनमें फर्जी बिल और वैक्सीन की सप्लाई चेन से जुड़े कागजात शामिल हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर पुलिस अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी जो इस अवैध कारोबार के पीछे मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

पुलिस का मानना है कि इन दस्तावेजों के विश्लेषण से नकली वैक्सीन के स्रोत और वितरण नेटवर्क का पता लगाने में बड़ी मदद मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि ड्रग इंस्पेक्टरों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।

इस मामले में अब तक की कार्रवाई के बारे में पुलिस ने बताया कि वे हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं। नकली दवाओं का स्वास्थ्य पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव अत्यंत चिंताजनक है, इसलिए पुलिस इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरत रही है।

आने वाले दिनों में पुलिस कुछ अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ कर सकती है। ड्रग इंस्पेक्टरों के बयानों और सौंपे गए दस्तावेजों का मिलान करने के बाद पुलिस अपनी अगली कार्रवाई तय करेगी।

कानपुर प्रशासन ने भी इस मामले को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बाजार में उपलब्ध अन्य दवाओं की गुणवत्ता की भी जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗