कानपुर में पेट्रोलियम रिसाइकलिंग फर्म पर छापेमारी, 1.40 करोड़ रुपये की कर चोरी का हुआ खुलासा
कानपुर में इस्तेमाल हो चुके पेट्रोलियम तेल को रिसाइकिल करने वाली एक फर्म के ठिकानों पर अधिकारियों ने छापेमारी की। करीब 10 घंटे तक चली इस जांच प्रक्रिया में 1.40 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी गई है। कार्रवाई के बाद संबंधित कारोबारी ने तत्काल प्रभाव से 65 लाख रुपये का भुगतान सरकारी खजाने में जमा कर दिया है।
VIMARSHNAARAD TVकानपुर में कर विभाग की टीम ने पेट्रोलियम तेल रिसाइकलिंग के व्यवसाय से जुड़ी एक फर्म के विभिन्न परिसरों पर औचक निरीक्षण किया। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य फर्म के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच करना था। अधिकारियों ने फर्म के कामकाज और कर भुगतान के दस्तावेजों का बारीकी से विश्लेषण किया।
जांच के दौरान अधिकारियों को बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले। रिपोर्ट के मुताबिक, इस फर्म द्वारा सरकारी नियमों का उल्लंघन करते हुए 1.40 करोड़ रुपये की कर चोरी की गई थी। अधिकारियों ने करीब 10 घंटे तक लगातार दस्तावेजों की पड़ताल की, जिसके बाद कर चोरी का यह आंकड़ा सामने आया।
इस कार्रवाई के बाद फर्म के मालिक पर कर बकाया चुकाने का दबाव बनाया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद कारोबारी ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की और 65 लाख रुपये की राशि तुरंत सरकारी खाते में जमा करा दी। शेष बकाया राशि की वसूली के लिए आगे की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है।
यह छापेमारी शहर में कर अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए की गई एक महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है। विभाग की ओर से इस मामले में और अधिक बारीकी से जांच की जा रही है ताकि कर चोरी के पूरे तंत्र को समझा जा सके।
कानपुर के व्यापारिक हलकों में इस छापेमारी की चर्चा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कर चोरी करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा। भविष्य में भी इस तरह के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे ताकि राजस्व की हानि को रोका जा सके।
फिलहाल, विभाग ने जब्त किए गए दस्तावेजों का अध्ययन शुरू कर दिया है। फर्म के अन्य वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कर चोरी की यह राशि और अधिक हो सकती है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कारोबारी द्वारा जमा कराई गई 65 लाख रुपये की राशि विभाग को प्राप्त हो गई है। शेष राशि को लेकर विभाग अपनी कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाएगा।