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कानपुर में मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा का बड़ा बयान, कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ जेन-जी का आंदोलन जारी

कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा ने देश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि मुट्ठी भर परिवारों ने देश की बड़ी आबादी को गरीबी में धकेल दिया है। खेड़ा ने युवाओं की पीढ़ी यानी जेन-जी के संघर्षों का समर्थन करते हुए कहा कि पेपर लीक और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के कारण युवा वर्ग अब व्यवस्था के खिलाफ मुखर हो रहा है।

कानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा ने देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि देश के सीमित परिवारों ने अपनी नीतियों और कार्यों से करोड़ों लोगों को आर्थिक तंगी की स्थिति में ला खड़ा किया है। उनके अनुसार, यह असमानता देश के विकास में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

खेड़ा ने युवाओं की नई पीढ़ी, जिसे जेन-जी कहा जाता है, के बढ़ते आक्रोश को जायज ठहराया। उन्होंने कहा कि यह युवा वर्ग अब चोरी, बेईमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े आंदोलन के रूप में सामने आ रहा है। उनके अनुसार, युवाओं का यह गुस्सा अचानक नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का असंतोष है।

मोटिवेशनल स्पीकर ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों ने युवाओं का भविष्य अंधकारमय कर दिया है। जब युवा अपनी मेहनत के बाद भी परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते, तो उनका व्यवस्था से भरोसा उठना स्वाभाविक है।

प्रशासनिक स्तर पर मिलने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी दफ्तरों में आम आदमी को न्याय मिलना मुश्किल हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सिस्टम में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक युवाओं का यह संघर्ष जारी रहेगा।

शिव खेड़ा ने अपने संबोधन में यह भी संकेत दिया कि देश की युवा शक्ति अब जागरूक हो रही है। वे केवल अपनी समस्याओं को देख ही नहीं रहे, बल्कि उनके समाधान के लिए सवाल भी पूछ रहे हैं। यह बदलाव आने वाले समय में देश की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

अंत में, उन्होंने भ्रष्टाचार को देश की प्रगति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा कि जब तक मुट्ठी भर लोगों का वर्चस्व रहेगा और आम युवा को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ेगा, तब तक देश की वास्तविक क्षमता का उपयोग नहीं हो पाएगा।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗