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कानपुर में वकीलों का बड़ा ऐलान: राष्ट्रीय लोक अदालत का करेंगे बहिष्कार, अदालतों में पसरा सन्नाटा

कानपुर में आयोजित अधिवक्ताओं के प्रांतीय सम्मेलन के दूसरे दिन वकीलों ने राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस दो दिवसीय न्यायिक कार्य बहिष्कार के कारण शहर की अदालतों में सन्नाटा छाया रहा और कामकाज पूरी तरह ठप रहा।

कानपुर में अधिवक्ताओं के प्रांतीय सम्मेलन का दूसरा दिन एक बड़े फैसले के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन के दौरान वकीलों ने सर्वसम्मति से यह घोषणा की कि वे आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत का बहिष्कार करेंगे। इस निर्णय ने न्यायिक गलियारों में हलचल मचा दी है और प्रशासन के लिए एक नई चुनौती पेश कर दी है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बहिष्कार के चलते कानपुर की अदालतों में कामकाज पूरी तरह से प्रभावित रहा। पिछले दो दिनों से चल रहे न्यायिक कार्य बहिष्कार के कारण अदालतों में सन्नाटा पसरा हुआ है। वकील अपनी मांगों को लेकर लामबंद हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे।

अदालतों में सन्नाटा होने के कारण आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जो लोग अपने मामलों की सुनवाई के लिए दूर-दराज से आए थे, उन्हें बिना किसी कार्यवाही के वापस लौटना पड़ा। न्यायिक कार्य ठप होने से लंबित मामलों की संख्या बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है।

वकीलों का कहना है कि यह बहिष्कार उनकी जायज मांगों के समर्थन में एक सांकेतिक कदम है। प्रांतीय सम्मेलन में जुटे अधिवक्ताओं ने अपनी एकता का प्रदर्शन करते हुए सरकार और न्यायपालिका से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है। वे अपनी मांगों को लेकर किसी भी समझौते के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

कानपुर के न्यायिक इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। वकीलों के इस कड़े रुख ने स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है। हालांकि, अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया या बातचीत का प्रस्ताव सामने नहीं आया है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल होती दिख रही है।

अधिवक्ताओं का यह सम्मेलन न केवल अपनी मांगों को रखने का एक मंच बना, बल्कि इसने वकीलों के बीच एकजुटता का संदेश भी दिया है। सम्मेलन के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और भविष्य की रणनीति तैयार की गई। वकीलों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन और वकीलों के बीच कोई मध्यस्थता हो पाती है या यह गतिरोध और लंबा खिंचेगा। फिलहाल, कानपुर की अदालतों में कामकाज के ठप रहने से न्याय प्रक्रिया पर असर पड़ना तय है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुरमूल रिपोर्ट देखें ↗