कानपुर में 100 करोड़ की साइबर ठगी का भंडाफोड़: तीन गिरफ्तार, बैंकों के अधिकारी भी जांच के दायरे में
कानपुर पुलिस ने म्यूल खातों के जरिए 100 करोड़ रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर अवैध लेनदेन करते थे। इस मामले में 23 बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, क्योंकि एनसीआरबी पोर्टल पर इनके खिलाफ 29 शिकायतें दर्ज थीं।
VIMARSHNAARAD TVकानपुर में साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। फजलगंज पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर म्यूल खातों का उपयोग करके करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह भोले-भाले लोगों को लालच देकर उनके नाम पर बचत, चालू और मर्चेंट खाते खुलवाता था। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता था।
जांच में यह बात सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए लगभग 100 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ एनसीआरबी पोर्टल पर दर्ज 29 शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की है।
इस मामले में अब 23 बैंकों के अधिकारी और कर्मचारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बैंक के अंदरूनी लोगों की मिलीभगत से ये खाते खोले गए थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि म्यूल खातों का इस्तेमाल करना एक गंभीर अपराध है। आरोपी इन खातों के जरिए ठगी की रकम को कई चरणों में ट्रांसफर करते थे ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि उनसे मिली जानकारी के आधार पर इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचा जा सकेगा।
साइबर सेल की टीम अब उन सभी खातों का विवरण जुटा रही है जिनका उपयोग इस धोखाधड़ी में किया गया था। बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध खातों की पहचान कर उन्हें तुरंत फ्रीज करें।
यह मामला साइबर सुरक्षा के प्रति आम लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
आने वाले समय में इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस इस पूरे रैकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा ले रही है।