किसान अब अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बन रहे हैं: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि कृषि-वोल्टेइक तकनीक से किसान एक ही जमीन से फसल और बिजली दोनों का उत्पादन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत लाखों पंप सौर ऊर्जा से चल रहे हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो रही है।

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में 7वें एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 के पूर्व समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जो किसान देश का पेट भरता है, वह अब ऊर्जा पैदा करके राष्ट्र को रोशन भी कर रहा है।
मंत्री ने कृषि-वोल्टेइक तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि इससे किसान एक ही एकड़ भूमि से फसल की बिक्री, बिजली की बिक्री और डीजल की बचत के जरिए तीन तरह से आय अर्जित कर सकते हैं। यह तकनीक छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय सुरक्षा का एक बड़ा जरिया बन सकती है।
पीएम-कुसुम योजना की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 29 लाख पंप सौर ऊर्जा से संचालित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य छोटे किसानों, सहकारी समितियों और पंचायतों को सशक्त बनाना है, ताकि भूमि का स्वामित्व किसानों के पास ही रहे।
श्री जोशी ने बताया कि भारत ने पिछले साल 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता जोड़ी है। उन्होंने शोध की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विभिन्न फसलों और जलवायु के अनुसार सही तकनीक का चुनाव करना जरूरी है। इसके लिए पुणे स्थित बीएआईएफ जैसे संस्थानों में परीक्षण किए जा रहे हैं।
मंत्री ने उद्योग जगत से ऐसी संरचनाएं विकसित करने का आग्रह किया जो ट्रैक्टरों और हार्वेस्टरों के संचालन में बाधा न डालें। उन्होंने कहा कि भारत का अनुभव वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए बहुत प्रासंगिक है, जहां छोटे खेत और भरपूर धूप उपलब्ध है।
सम्मेलन के दौरान 'फार्म टू फोर्क इनोवेशन' विषय पर आधारित एग्रीवोल्टिक्स पिच हब की घोषणा की गई। यह सम्मेलन 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा, जहां दुनिया भर के विशेषज्ञ कृषि और सौर ऊर्जा के एकीकरण पर चर्चा करेंगे।
