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केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 'कहो कालिदास!' पुस्तक का विमोचन किया, नारी पात्रों पर चर्चा

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली में युगल जोशी द्वारा लिखित पुस्तक 'कहो कालिदास!' का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कालिदास की रचनाओं में नारी पात्र केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं, बल्कि गरिमा और चेतना के मूर्त रूप हैं। कार्यक्रम में साहित्य और कला जगत के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 'कहो कालिदास!' पुस्तक का विमोचन किया, नारी पात्रों पर चर्चा
आधिकारिक स्रोत का चित्र: Press Information Bureau, Government of India · PIB reusable material · Press Information Bureau

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) में आयोजित एक कार्यक्रम में 'कहो कालिदास!' पुस्तक का विमोचन किया। युगल जोशी द्वारा लिखित और मंजुल पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक महान संस्कृत कवि कालिदास के जीवन और उनके साहित्य के विभिन्न पहलुओं का अन्वेषण करती है।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मंत्री शेखावत ने कहा कि कालिदास की कृतियों में चित्रित महिलाएं केवल सौंदर्य का विषय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कवि ने उन्हें प्रेम, गरिमा और चेतना के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक कालिदास के व्यक्तिगत जीवन के उन अनछुए पहलुओं को सामने लाने का एक प्रयास है, जिनके बारे में ऐतिहासिक विवरण सीमित हैं।

मंत्री ने कहा कि कल्पना मानव जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है और साहित्य हमें इतिहास के उन आयामों को समझने का अवसर देता है जो केवल तथ्यों से परे हैं। उन्होंने लेखक युगल जोशी की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक वर्तमान पीढ़ी को कालिदास के साथ एक नया संवाद स्थापित करने का मौका देगी।

पुस्तक के लेखक युगल जोशी ने प्रसिद्ध लेखक गोएथे का उल्लेख करते हुए कहा कि कालिदास की रचना 'शाकुंतलम्' में स्वर्ग और पृथ्वी का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कालिदास किसी एक क्षेत्र के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की धरोहर हैं।

कार्यक्रम में साहित्य, कला और शिक्षा जगत से जुड़े कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि कालिदास की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी वे अपने समय में थीं। यह पुस्तक उनके जीवन के प्रति एक नई दृष्टि प्रदान करती है।

इस अवसर पर कालिदास के जीवन के विभिन्न आयामों, जैसे प्रकृति, विरह और मानवीय संवेदनाओं पर भी चर्चा की गई। मंत्री शेखावत ने आशा व्यक्त की कि यह पुस्तक व्यापक रूप से पढ़ी जाएगी और पाठकों को कवि की संवेदनाओं को गहराई से समझने में मदद करेगी।

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