केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने खेल मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित किया
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने नई दिल्ली में मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ने के साथ हिंदी की आवश्यकता भी बढ़ेगी। उन्होंने सरकारी कामकाज और दैनिक व्यवहार में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया और कहा कि भारतीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन अत्यंत आवश्यक है।

केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), नई दिल्ली में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में खेल सचिव श्री हरि रंजन राव, राज्यसभा सदस्य सुश्री स्वाति मालिवाल और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की शक्ति उसकी भाषा में निहित होती है। उन्होंने जोर दिया कि जैसे-जैसे भारत की वैश्विक शक्ति बढ़ रही है, दुनिया भर में हिंदी की मांग भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल बैठकों तक सीमित न रखकर इसे सरकारी कामकाज और दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाना चाहिए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि हिंदी को बढ़ावा देने का अर्थ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की उपेक्षा करना नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की सभी क्षेत्रीय भाषाओं का संरक्षण और संवर्धन जरूरी है। उन्होंने नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं के साथ हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान विद्यार्थियों के लिए नए अवसर खोलता है।
डॉ. मांडविया ने कहा कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए समाज में आत्मविश्वास और प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया भारत के साथ संवाद करना चाहेगी, तो हिंदी सीखने की आवश्यकता स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी। उन्होंने महात्मा गांधी और लोकमान्य तिलक जैसे महापुरुषों के विचारों को याद करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर देते हैं।
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने अपने-अपने विभागों में राजभाषा हिंदी के उपयोग को लेकर हुई प्रगति की जानकारी दी। मंत्रालय द्वारा सरकारी पत्राचार में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के प्रयासों पर भी चर्चा की गई।
सदस्यों और विशेषज्ञों ने सरकारी योजनाओं को आम जनता तक सरल हिंदी में पहुंचाने के लिए कई रचनात्मक सुझाव दिए। डॉ. मांडविया ने इन सुझावों की सराहना की और कहा कि इन पर गंभीरता से विचार किया जाएगा ताकि हिंदी के व्यावहारिक उपयोग को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
