केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने महाराष्ट्र के पर्यटन स्थलों पर सूर्य किरण एयर शो की मांग की
केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से महाराष्ट्र के लोनार, अजंता और एलोरा में सूर्य किरण एरोबेटिक टीम का प्रदर्शन आयोजित करने का आग्रह किया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य की पर्यटन क्षमता को बढ़ावा देना और युवाओं को भारतीय वायु सेना के प्रति प्रेरित करना है। यह कार्यक्रम नवंबर 2026 में आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को एक पत्र लिखकर महाराष्ट्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबेटिक डिस्प्ले टीम के प्रदर्शन का अनुरोध किया है। उन्होंने इस आयोजन के लिए 23 से 25 नवंबर, 2026 के बीच की तिथियां प्रस्तावित की हैं।
मंत्री ने अपने पत्र में सूर्य किरण टीम की हवाई युद्धाभ्यास में सटीकता और कौशल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रदर्शन न केवल भारत की विमानन क्षमताओं को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि आम जनता में गहरी रुचि भी पैदा करते हैं।
जाधव के अनुसार, यह आयोजन युवाओं को भारतीय वायु सेना में करियर बनाने के अवसरों को समझने के लिए प्रोत्साहित करने का एक प्रभावी माध्यम हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से बुलढाणा जिले की लोनार क्रेटर झील का उल्लेख किया, जो अपनी अनूठी भूवैज्ञानिक विशेषताओं और खारे पानी के लिए जानी जाती है।
इसके अलावा, उन्होंने अजंता और एलोरा की गुफाओं को भी इस प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थल बताया है। ये दोनों स्थान अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं और वैश्विक स्तर पर पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
मंत्री ने रक्षा मंत्रालय से इन स्थलों पर एयर शो और उससे संबंधित प्रेरणादायक गतिविधियों के आयोजन के लिए आवश्यक मंजूरी देने का आग्रह किया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में उचित निर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया है।
इस प्रस्तावित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों की ओर पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करना है। साथ ही, यह महाराष्ट्र की समृद्ध विरासत को उजागर करने और देश की विमानन उत्कृष्टता को प्रदर्शित करने का एक मंच प्रदान करेगा।
पीआईबी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह पहल राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से की गई है। रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना शेष है।
