केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रस्तावित 'सीड बिल' पर किसान संगठनों से की चर्चा
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित 'सीड बिल' पर व्यापक संवाद किया। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की सहमति से ही कानून को अंतिम रूप देगी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में देशभर के किसान संगठनों के शीर्ष नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित 'सीड बिल' पर किसानों के सुझाव और उनकी राय जानना था।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और कोई भी नीति संवाद के माध्यम से ही तय की जाएगी। बैठक में भारतीय किसान संघ और अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति सहित कई राज्यों के किसान प्रतिनिधि शामिल हुए।
शिवराज सिंह ने बताया कि वर्तमान बीज अधिनियम 1966 का है, जो आज की जरूरतों के हिसाब से पुराना हो चुका है। उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर हैं, जिससे नकली बीजों पर लगाम लगाना कठिन हो गया है।
उन्होंने कहा कि नया कानून अधिक प्रभावी और सख्त होगा ताकि किसानों को घटिया बीजों से मुक्ति मिल सके। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून से किसानों के पारंपरिक बीजों के उपयोग और आदान-प्रदान पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
किसानों को अपनी किस्मों के पंजीकरण के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा, हालांकि स्वेच्छा से पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध रहेगी। उन्होंने बताया कि पिछले साल इस बिल के मसौदे पर लगभग 18,000 सुझाव प्राप्त हुए थे, जिनका अध्ययन किया जा रहा है।
सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है और सुझावों का क्रम जारी रहेगा। अंत में, मंत्री ने कहा कि यह कानून कृषि क्षेत्र को नकली बीजों के दंश से मुक्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
