क्या स्मार्टफोन बच्चों की सीखने की क्षमता को बना रहा है कमजोर? कोविड के बाद आई गिरावट
कोविड महामारी के बाद छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन में लगातार गिरावट देखी जा रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इसका एक प्रमुख कारण बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम है। जिन बच्चों का स्मार्टफोन या अन्य डिजिटल उपकरणों पर समय अधिक बीत रहा है, उनका प्रदर्शन अन्य छात्रों की तुलना में खराब पाया गया है। यह स्थिति बच्चों के मानसिक और शैक्षणिक विकास के लिए चिंता का विषय है।
VIMARSHNAARAD TVकोविड-19 महामारी के बाद से छात्रों के सीखने के स्तर में आई गिरावट एक वैश्विक चिंता का विषय बन गई है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में इस गिरावट के पीछे के कारणों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है।
अध्ययन में पाया गया है कि जो छात्र स्मार्टफोन, टैबलेट या कंप्यूटर पर अधिक समय बिताते हैं, उनकी पढ़ाई में एकाग्रता कम हो रही है। डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग ने बच्चों की सोचने और समझने की क्षमता पर असर डाला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के दौरान ऑनलाइन शिक्षा की मजबूरी ने बच्चों को स्क्रीन का आदी बना दिया है। महामारी खत्म होने के बाद भी यह आदत बरकरार है, जो अब उनके प्रदर्शन में गिरावट के रूप में सामने आ रही है।
रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम नियंत्रित है, उनका प्रदर्शन उन बच्चों की तुलना में बेहतर है जो घंटों तक डिजिटल स्क्रीन से चिपके रहते हैं। यह अंतर छात्रों के परीक्षा परिणामों में भी साफ दिखाई दे रहा है।
अभिभावकों के लिए यह एक चेतावनी है कि वे अपने बच्चों के डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर नजर रखें। स्क्रीन टाइम का सीधा संबंध बच्चों के मानसिक विकास और उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों से जुड़ा हुआ है।
शिक्षाविदों ने सुझाव दिया है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया से बाहर निकालकर शारीरिक गतिविधियों और किताबों की ओर प्रोत्साहित करना आवश्यक है। केवल स्क्रीन टाइम कम करके ही छात्रों के प्रदर्शन में सुधार लाया जा सकता है।
यह रिपोर्ट शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ा संकेत है कि तकनीक का सही संतुलन बनाना कितना जरूरी है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में छात्रों की सीखने की क्षमता पर और भी बुरा असर पड़ सकता है।