गंगा की स्वच्छता के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर, पर्यावरण मंत्री सक्सेना ने साझा किए अपने विचार
उत्तर प्रदेश के पर्यावरण मंत्री सक्सेना ने गंगा को केवल एक नदी नहीं बल्कि आस्था का केंद्र बताया है। उन्होंने कहा कि गंगा की पवित्रता बनाए रखने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। नदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी पर बल देते हुए उन्होंने इसे जीवन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर के रूप में रेखांकित किया है।

लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के पर्यावरण मंत्री सक्सेना ने गंगा नदी के संरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा केवल जल का स्रोत नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था का एक अटूट हिस्सा है। उनके अनुसार, गंगा का महत्व हमारे जीवन के हर पहलू से गहराई से जुड़ा हुआ है।
मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि नदी की निर्मलता बनाए रखना किसी एक विभाग या सरकार का काम नहीं है। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। जनभागीदारी के बिना नदी को प्रदूषण से मुक्त करना एक कठिन चुनौती है।
पर्यावरण मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे गंगा को एक धरोहर के रूप में देखें और इसके संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर प्रयास करे, तो गंगा को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
अमर उजाला नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने गंगा के प्रति लोगों के लगाव को ही इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक इच्छाशक्ति से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को सुधारा जा सकता है।
गंगा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नदी के तटों पर स्वच्छता बनाए रखने और कचरा न फैलाने का आह्वान किया।
अंत में, उन्होंने कहा कि गंगा की शुद्धता का अर्थ केवल पानी की गुणवत्ता से नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली में बदलाव से भी है। उन्होंने सभी से इस पुनीत कार्य में सहयोग करने का आग्रह किया।
