ताज़ा अपडेटगुजरात में काग़ज़ी राजनीतिक दलों के खिलाफ सीआईडी की कार्रवाई, बीबीसी की पड़ताल का असर
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गुजरात में काग़ज़ी राजनीतिक दलों के खिलाफ सीआईडी की कार्रवाई, बीबीसी की पड़ताल का असर

बीबीसी की एक जांच के बाद गुजरात में फर्जी या कागजी राजनीतिक दलों के खिलाफ सीआईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। इन दलों को मिलने वाले करोड़ों रुपये के चंदे को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद विपक्ष के कई नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी थी। अब इस मामले में कम से कम तीन ऐसी पार्टियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जो केवल कागजों पर ही अस्तित्व में थीं।

गुजरात में फर्जी राजनीतिक दलों के खिलाफ सीआईडी ने सख्त कदम उठाए हैं। बीबीसी की एक विस्तृत पड़ताल में यह सामने आया था कि कैसे कई राजनीतिक दल केवल कागजों पर चल रहे हैं और उन्हें भारी मात्रा में चंदा मिल रहा है। इस खुलासे के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई थी और विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही की मांग की थी।

बीबीसी की रिपोर्ट के बाद कई विपक्षी नेताओं और पार्टियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया था। उन्होंने इन कागजी दलों को मिलने वाले चंदे की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए थे। अब इस मामले में कार्रवाई करते हुए सीआईडी ने कम से कम तीन ऐसी पार्टियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

इन पार्टियों पर आरोप है कि इन्होंने नियमों को ताक पर रखकर चंदा हासिल किया और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन दलों का उपयोग धन शोधन या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।

सीआईडी की इस कार्रवाई को एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं और आने वाले समय में अन्य संदिग्ध दलों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। बीबीसी की पड़ताल ने इस व्यवस्था में मौजूद खामियों को उजागर किया है, जिससे अब प्रशासन को सख्त रुख अपनाना पड़ रहा है।

इस मामले में आगे की जांच जारी है। सीआईडी उन सभी लोगों और संस्थाओं की पहचान करने में जुटी है जो इन कागजी दलों को चंदा देने या उन्हें संचालित करने में शामिल थे।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह कार्रवाई उन दलों के खिलाफ की गई है जो चुनाव आयोग के नियमों का पालन नहीं कर रहे थे और जिनका कोई वास्तविक जमीनी आधार नहीं था।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗