ताज़ा अपडेटग्राहम स्टेंस हत्याकांड: 27 साल बाद भी ओड़िशा के मनोहरपुर में यादों का दर्द बरकरार
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ग्राहम स्टेंस हत्याकांड: 27 साल बाद भी ओड़िशा के मनोहरपुर में यादों का दर्द बरकरार

ओड़िशा के मनोहरपुर में 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों की हत्या की घटना आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। बीबीसी की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस वीभत्स कांड में दारा सिंह को भीड़ का नेतृत्व करने का दोषी पाया गया था। घटना के इतने वर्षों बाद भी स्थानीय निवासी उस खौफनाक रात को भूल नहीं पाए हैं और क्षेत्र में आज भी उस हिंसा की टीस महसूस की जाती है।

ओड़िशा के मनोहरपुर में 1999 में हुई एक दुखद घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो मासूम बेटों को एक उग्र भीड़ ने जिंदा जला दिया था। इस घटना को बीते हुए 27 साल हो चुके हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए वह खौफनाक यादें आज भी धुंधली नहीं हुई हैं।

बीबीसी की एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय इस हिंसा का नेतृत्व करने के आरोप में दारा सिंह को दोषी ठहराया गया था। इस घटना ने न केवल क्षेत्र की शांति को भंग किया, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी गहरे घाव दिए। आज भी जब उस दौर की चर्चा होती है, तो लोगों के चेहरे पर उस समय का डर साफ देखा जा सकता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उस रात जो कुछ भी हुआ, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए एक काला अध्याय है। उस घटना के बाद से मनोहरपुर की फिजाओं में एक अजीब सी खामोशी और दर्द का अहसास बना हुआ है। लोग आज भी उस घटना को याद कर सिहर उठते हैं।

इस हत्याकांड ने न केवल एक परिवार को तबाह किया, बल्कि पूरे इलाके के सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित किया। उस समय की रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ द्वारा की गई इस बर्बरता ने देश भर में आक्रोश पैदा कर दिया था।

आज इतने वर्षों बाद भी, जब लोग उस घटना के बारे में बात करते हैं, तो उनकी आवाज में एक गहरा दुख और पछतावा महसूस होता है। वे बताते हैं कि कैसे उस रात ने उनके जीवन और उनके गांव की पहचान को हमेशा के लिए बदल दिया।

कानूनी प्रक्रिया के तहत दारा सिंह को दोषी करार दिया गया था, जिसने इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया था। हालांकि, सजा मिलने के बावजूद, उस घटना से उपजे जख्म आज भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं।

मनोहरपुर के लोग अब शांति और सद्भाव के साथ रहना चाहते हैं, लेकिन अतीत की ये यादें समय-समय पर उन्हें उस दुखद घटना की याद दिलाती रहती हैं। यह रिपोर्ट उस दौर के दर्द और आज की स्थिति का एक मार्मिक चित्रण पेश करती है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01BBC News हिंदीमूल रिपोर्ट देखें ↗