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घर का शोर बन रहा सेहत के लिए खतरा: मिक्सी, कूलर और ईयरबड्स से बढ़ रही सुनने की समस्या

आगरा के सिजीकॉन अस्पताल के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि घरेलू उपकरणों का अत्यधिक शोर कान की सेहत बिगाड़ रहा है। मिक्सी, कूलर और मोबाइल में ईयरबड्स का लगातार इस्तेमाल सुनने की क्षमता कम करने और चिड़चिड़ापन पैदा करने का कारण बन रहा है। विशेषज्ञों ने ध्वनि प्रदूषण से बचने और कानों को आराम देने की सलाह दी है।

आधुनिक जीवनशैली में हम जिन घरेलू उपकरणों का रोजमर्रा में इस्तेमाल करते हैं, वे धीरे-धीरे हमारी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा रहे हैं। आगरा के सिजीकॉन अस्पताल के विशेषज्ञों ने इस बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि मिक्सी, कूलर और टीवी की तेज आवाज अब स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

डॉक्टरों के अनुसार, इन उपकरणों से निकलने वाला शोर न केवल कानों में झनझनाहट पैदा करता है, बल्कि यह मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन का भी बड़ा कारण है। लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से सुनने की शक्ति कम होने का खतरा बढ़ जाता है।

इसके अलावा, मोबाइल फोन के साथ ईयरबड्स का अत्यधिक उपयोग भी कानों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। युवा पीढ़ी में ईयरबड्स के बढ़ते चलन ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। कान में सीधे तेज आवाज जाने से आंतरिक अंगों पर बुरा असर पड़ता है।

विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि घर में शोर कम करने के लिए उपकरणों का उपयोग सीमित और नियंत्रित मात्रा में किया जाना चाहिए। मिक्सी या कूलर जैसे उपकरणों को चलाते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

ध्वनि प्रदूषण से बचने के लिए कानों को नियमित अंतराल पर आराम देना आवश्यक है। यदि किसी को कानों में लगातार झनझनाहट या कम सुनाई देने जैसी समस्या महसूस हो रही है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

अस्पताल के डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घर के वातावरण को शांत रखने का प्रयास करें। शोर-शराबे से दूर रहना न केवल सुनने की क्षमता को सुरक्षित रखता है, बल्कि मानसिक शांति के लिए भी जरूरी है।

यह समस्या अब केवल औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे घरों के भीतर भी पैर पसार चुकी है। जागरूकता ही इस समस्या से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरामूल रिपोर्ट देखें ↗