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चित्रकूट: आजादी के 78 साल बाद भी सड़क से महरूम ग्रामीण, मरीज को टाट में ढोने को मजबूर

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के थरपहाड़ गांव में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। आजादी के 78 साल बाद भी यहां पक्की सड़क नहीं बन सकी है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, एक बीमार युवक को अस्पताल ले जाने के लिए ग्रामीणों को उसे टाट में बांधकर कंधे पर उठाना पड़ा, जिससे प्रशासन की लापरवाही और संवेदनहीनता उजागर हुई है।

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में एक हृदयविदारक घटना ने विकास के दावों की पोल खोल दी है। नगर परिषद क्षेत्र के थरपहाड़ गांव में रहने वाले लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है।

हाल ही में, 28 वर्षीय गोरे सिंह गंभीर रूप से बीमार हो गए। उन्हें लगातार उल्टी और दस्त की समस्या हो रही थी, जिसके कारण उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई। सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस या कोई अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।

मजबूरन ग्रामीणों को एक जुगाड़ का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने गोरे सिंह को एक टाट (बोरी) में बांधा और उसे अपने कंधों पर उठाकर मुख्य मार्ग तक ले जाने का निर्णय लिया। यह दृश्य न केवल कष्टदायक था, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को भी दर्शाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सड़क की मांग की है, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं। आज भी उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कठिन रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की बेपरवाही के कारण ही आज उन्हें अपने बीमार परिजनों को इस तरह ढोने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

यह स्थिति तब है जब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के जाल बिछाने और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है। थरपहाड़ गांव की यह तस्वीर उन दावों की हकीकत बयां करने के लिए काफी है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस गांव को मुख्य सड़क से जोड़े ताकि भविष्य में किसी को भी ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े। फिलहाल, इस मामले पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली है।

स्रोत

मूल संदर्भ

01न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूटमूल रिपोर्ट देखें ↗