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चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का रौद्र रूप: 250 से अधिक दुकानें तबाह, 100 करोड़ का नुकसान

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के जलस्तर में वृद्धि के बाद आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। रामघाट क्षेत्र में 250 से अधिक दुकानें नष्ट हो गई हैं और एक पूरा होटल पानी में डूब गया है। अनुमान के अनुसार, इस आपदा से करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर कम होने के बाद बाढ़ से हुई बर्बादी का भयावह मंजर सामने आया है। रामघाट के आसपास के इलाकों में पानी का स्तर इतना अधिक था कि इसने सब कुछ अपनी चपेट में ले लिया। बृहस्पतिवार की शाम तक कई मंदिर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरी तरह से जलमग्न थे।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ के कारण 250 से अधिक दुकानें पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। व्यापारियों का सामान पानी में बह गया या खराब हो गया, जिससे उन्हें भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, एक पूरा होटल भी पानी में डूब गया, जिससे संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा है।

बाढ़ की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोगों के महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिग्रियां भी पानी के साथ बह गईं। स्थानीय निवासियों के लिए यह एक बड़ी त्रासदी है। प्रशासन के अनुमान के मुताबिक, इस प्राकृतिक आपदा से लगभग 100 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

रामघाट, जो चित्रकूट का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब वहां कीचड़ और मलबे का ढेर जमा हो गया है। स्थानीय प्रशासन सफाई और राहत कार्यों में जुटा हुआ है।

प्रभावित दुकानदारों और निवासियों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि उनकी आजीविका पूरी तरह से नष्ट हो गई है और उन्हें फिर से खड़ा होने के लिए सरकारी मदद की सख्त जरूरत है।

अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया है और नुकसान का आकलन करने के लिए टीमें गठित की गई हैं। राहत शिविरों के माध्यम से प्रभावित लोगों को भोजन और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

चित्रकूट में आई यह बाढ़ पिछले कई वर्षों में सबसे विनाशकारी मानी जा रही है। मंदाकिनी नदी का यह रौद्र रूप स्थानीय लोगों के लिए एक कभी न भूलने वाला जख्म बन गया है। स्थिति पर निरंतर नजर रखी जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर इंतजाम किए जा सकें।

स्रोत

मूल संदर्भ

01अमर उजाला नेटवर्क, चित्रकूटमूल रिपोर्ट देखें ↗