चीन और मिस्र के संयुक्त वायु अभ्यास से भारत की चिंता, राफेल जेट की क्षमताओं पर नजर
चीन की वायुसेना और मिस्र की वायुसेना के बीच 'ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन' अभ्यास 2026 चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय वायुसेना के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि चीन इस अभ्यास के जरिए राफेल लड़ाकू विमानों की तकनीकी जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहा है।
VIMARSHNAARAD TVदुनिया के एक हिस्से में इन दिनों 'ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन' अभ्यास 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इस सैन्य अभ्यास में चीन की वायुसेना (PLAAF) और मिस्र की वायुसेना (EAF) एक साथ हिस्सा ले रही हैं। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह घटनाक्रम भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए चिंता का कारण बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस अभ्यास के माध्यम से राफेल लड़ाकू विमानों की तकनीकी बारीकियों को समझने की कोशिश कर रहा है। मिस्र के पास भी राफेल विमान मौजूद हैं, और चीन की वायुसेना के साथ उनके संयुक्त अभ्यास से भारत की सुरक्षा चिंताओं में वृद्धि हुई है।
भारतीय वायुसेना के लिए यह स्थिति सतर्क रहने वाली है। राफेल विमानों की क्षमताओं और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर चीन की बढ़ती दिलचस्पी को भारत गंभीरता से ले रहा है।
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि चीन का उद्देश्य राफेल की उन तकनीकी खूबियों का पता लगाना है जो उसे अन्य विमानों से अलग बनाती हैं। इस तरह के संयुक्त अभ्यास अक्सर खुफिया जानकारी जुटाने के अवसर के रूप में देखे जाते हैं।
भारत ने राफेल विमानों को अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए शामिल किया है। इन विमानों की मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक भारत की रक्षा तैयारियों का एक अहम हिस्सा है।
फिलहाल, भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। चीन और मिस्र के बीच हो रहे इस अभ्यास के रणनीतिक निहितार्थों का आकलन किया जा रहा है।
यह पहली बार नहीं है जब चीन ने अन्य देशों के साथ अभ्यास के जरिए सैन्य तकनीक समझने का प्रयास किया हो। भारत के लिए अपनी सुरक्षा को और अधिक मजबूत करना अब प्राथमिकता बन गया है।