जम्मू-कश्मीर: नशीले पदार्थों की लत से उबरकर खेल के मैदान में लौटे सज्जाद की प्रेरणादायक कहानी
बडगाम के 25 वर्षीय सज्जाद ने नशीले पदार्थों की निर्भरता से सफलतापूर्वक मुक्ति पाई है। सरकारी पुनर्वास केंद्र की मदद से उन्होंने न केवल अपना स्वास्थ्य सुधारा, बल्कि अब वे क्रिकेट में वापसी कर 'नशा मुक्त भारत अभियान' के माध्यम से युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के रहने वाले 25 वर्षीय सज्जाद (बदला हुआ नाम) ने नशीले पदार्थों की लत को पीछे छोड़कर एक नई शुरुआत की है। एक प्रतिभाशाली क्रिकेटर और स्नातक सज्जाद के लिए यह सफर चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
नशीले पदार्थों के सेवन ने उनके शारीरिक स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिति और खेल करियर को बुरी तरह प्रभावित किया था। इसके कारण उन्हें सामाजिक अलगाव और आत्मविश्वास की कमी का सामना करना पड़ा। उनके परिवार को भी वित्तीय कठिनाइयों और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा।
सज्जाद को 'नशीले पदार्थों की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना' (एनएपीडीडीआर) के तहत संचालित 'चाराह साज़' जिला नशा मुक्ति केंद्र से महत्वपूर्ण सहायता मिली। यहाँ उन्हें निःशुल्क उपचार, परामर्श और मनोवैज्ञानिक देखभाल प्रदान की गई।
उनके पुनर्वास कार्यक्रम में योग, फिटनेस सत्र, कंप्यूटर प्रशिक्षण और कौशल विकास को शामिल किया गया था। इन प्रयासों ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद की, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में वापस लौट सके।
सज्जाद ने न केवल अपनी लत पर विजय प्राप्त की, बल्कि उन्होंने क्रिकेट के मैदान पर भी वापसी की है। वे अब एक पूर्णकालिक कर्मचारी के रूप में भी कार्यरत हैं।
वर्तमान में, सज्जाद 'नशा मुक्त भारत अभियान' के एक सक्रिय अभियानकर्ता हैं। वे अपने अनुभव साझा कर अन्य युवाओं को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार, समय पर उपचार और पुनर्वास से प्रभावित व्यक्ति अपना आत्मविश्वास बहाल कर सकते हैं। सज्जाद की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन से जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।
