जालौन के आईएएस रिंकू सिंह राही ने सरकारी वाहनों की आउटसोर्सिंग प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश के जालौन में तैनात आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सरकारी कामकाज में वाहनों को किराए पर लेने की मौजूदा व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इस संबंध में श्रमायुक्त और परिवहन आयुक्त को आधिकारिक पत्र लिखकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। राही के इस कदम से प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, क्योंकि उन्होंने आउटसोर्सिंग प्रणाली की कार्यप्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है।
VIMARSHNAARAD TVउत्तर प्रदेश के जालौन जिले में संयुक्त मजिस्ट्रेट के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। इस बार उन्होंने सरकारी विभागों में वाहनों की आउटसोर्सिंग की प्रक्रिया को लेकर अपनी असहमति और चिंताएं व्यक्त की हैं।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, आईएएस अधिकारी ने इस विषय पर राज्य के श्रमायुक्त और परिवहन आयुक्त को एक औपचारिक पत्र प्रेषित किया है। अपने इस पत्र के माध्यम से उन्होंने सरकारी कार्यों के लिए निजी वाहनों को किराए पर लेने की वर्तमान व्यवस्था की पारदर्शिता और औचित्य पर प्रश्नचिह्न लगाया है।
रिंकू सिंह राही का यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी खर्चों और आउटसोर्सिंग के नियमों को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। उन्होंने अपने पत्राचार में इस व्यवस्था से जुड़ी संभावित खामियों की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है।
अधिकारी द्वारा उठाए गए इन सवालों के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल देखी जा रही है। हालांकि, अभी तक संबंधित विभागों की ओर से इस पत्र के जवाब में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यह पहली बार नहीं है जब रिंकू सिंह राही ने किसी प्रशासनिक मुद्दे पर मुखर होकर अपनी बात रखी है। वे पूर्व में भी अपने कार्यों और निर्णयों के चलते चर्चा में रहे हैं। उनके इस हालिया कदम को सरकारी तंत्र में सुधार की दिशा में एक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल, यह मामला अब उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवहन और श्रम विभाग इस पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या भविष्य में आउटसोर्सिंग के नियमों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के सवाल सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस पत्र के आधार पर सरकार क्या कदम उठाती है।