टेकबॉल खिलाड़ी क्विम्सी डिसूजा का संकल्प, भारत में खेल को नई पहचान दिलाने का किया वादा
टेकबॉल खिलाड़ी क्विम्सी डिसूजा ने हालिया नतीजों पर निराशा जताते हुए कहा कि परिणाम उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे। हालांकि, उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने का संतोष व्यक्त किया। अब क्विम्सी का मुख्य लक्ष्य भारत में टेकबॉल खेल को लोकप्रिय बनाना और इसे एक नई पहचान दिलाना है। उन्होंने हार को स्वीकार करते हुए खेल के प्रति अपने जुनून को बरकरार रखने की बात कही है।
टेकबॉल की उभरती खिलाड़ी क्विम्सी डिसूजा ने हाल ही में अपने प्रदर्शन और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की है। एनडीटीवी के साथ साझा किए गए अपने विचारों में उन्होंने स्वीकार किया कि हालिया प्रतियोगिता के नतीजे उनके मन मुताबिक नहीं रहे। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी थी और अपना पूरा प्रयास किया था।
क्विम्सी के अनुसार, खेल में हार को स्वीकार करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि जब आप कड़ी मेहनत करते हैं और परिणाम वैसा नहीं मिलता, तो मन में थोड़ी निराशा होना स्वाभाविक है। बावजूद इसके, उन्होंने हार मानने के बजाय अपने खेल के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है।
अब क्विम्सी का ध्यान केवल अपनी व्यक्तिगत जीत तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारत में टेकबॉल के भविष्य को लेकर एक बड़ा संकल्प लिया है। उनका मानना है कि इस खेल में भारत के पास अपार संभावनाएं हैं और इसे देश के कोने-कोने तक पहुँचाने की आवश्यकता है।
क्विम्सी ने कहा कि वह चाहती हैं कि भारत के लोग टेकबॉल को बेहतर तरीके से समझें और इससे जुड़ें। उनका लक्ष्य इस खेल को एक नई पहचान दिलाना है ताकि भविष्य में और भी खिलाड़ी इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।
उनकी यह यात्रा केवल एक खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि एक खेल प्रमोटर के रूप में भी देखी जा रही है। क्विम्सी का मानना है कि जागरूकता और सही मार्गदर्शन से भारत में टेकबॉल का स्तर काफी ऊपर जा सकता है।
अंत में, क्विम्सी ने अपने प्रशंसकों और खेल प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भले ही उन्हें पदक न मिला हो, लेकिन उन्हें लोगों का भरपूर प्यार और समर्थन मिला है। यह समर्थन ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
क्विम्सी का यह जज्बा न केवल टेकबॉल के लिए, बल्कि अन्य उभरते खेलों के लिए भी एक मिसाल है। उनकी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण आने वाले समय में भारतीय खेल जगत में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
